चार नवम्बर को बन रहे महाकार्तिकी योग, व्यक्ति को मिलेगी सफलता

0
140

 कानपुर, 02 नवम्बर । कार्तिक के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को कार्तिक (कतकी) मनाई जाती है। इस दिन गंगा स्नान, दान और त्रिदेव भगवान की पूजा का महत्व है। पुराण के अनुसार इस दिन भरणी नक्षत्र होने से इसका फल हजार गुना बढ़ जाता है। चार नवंबर को भरणी नक्षत्र होने से महाकार्तिकी योग बन रहा है।

इस दौरान शुरू किए गए कार्यों में सफलता जरूर मिलती है। कार्तिक पूर्णिमा में गंगा स्नान के साथ दीपदान का महत्व है। इस दिन सिखों के गुरु गुरुनानक देव का भी जन्म हुआ था। स्कंद पुराण के अनुसार कतकी में त्रिदेव (ब्रह्म, विष्णु और महेश) का विशेष महत्व है। सिद्धयोग होने से गंगा स्नान से हजार गुना फल प्राप्त होगा। शिव-पार्वती के साथ भगवान गणेश और कार्तिकेय का पूजन भी होता है।
मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन ब्रह्म, विष्णु और महेश भेष बदलकर स्नान करते हैं। पं0 दीपक पांडेय ने बताया कि इस दिन दीपदान का भी महत्व है। गंगा स्नान के बाद दीपक प्रज्वलित करने से भगवान विष्णु के साथ लक्ष्मीजी की कृपा बरसती है। इस दिन वस्त्रों का भी दान किया जाता है।

पं0 योगेश अवस्थी के मुताबिक कार्तिक पूर्णिमा को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं। पुराण के अनुसार इस दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर दैत्य का वध किया था। तभी से कार्तिक पूर्णिमा के दिन लोग गंगा स्नान कर भगवान शिव की पूजा करने लगे। एक अन्य कथा में बताया गया कि इस दिन भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया था। इस दिन लोग विष्णु की पूजा करते हैं। शिव पुत्र कार्तिकेय की छह माताओं शिवा, सम्मुत, प्रीती, संतति, अनुसुईया और क्षमा की भी पूजा होती है।

दान का है महत्व
इस दिन दीपक दान करने से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा बरसती है। इस दिन बैल का दान देने से इसका कई गुना फल मिलता है। ऊनी वस्त्र, फल, चावल, गेहूं, सफेद कपड़े, तिल, दूध दान देने से वंश बढ़ता है।

LEAVE A REPLY