कार्तिक पूर्णिमा पर कानपुर में गंगा के घाटों पर श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब

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कानपुर, 04 नवम्बर । भगवान विष्णु के बेहद प्रिय मास कार्तिक की पूर्णिमा पर शनिवार शहर के श्रद्धालुओं ने अलसुबह से ही गंगा के घाटों का रुख किया। विभिन्न घाटों पर श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान कर पूजन अर्चना की और दान पुण्य किया। तो वहीं प्रशासन भी घाटों पर मुस्तैदी से डटा रहा। 

भगवान विष्णु के इस अवतार की तिथि होने की वजह से आज किए गए दान, जप का पुण्य दस यज्ञों से प्राप्त होने वाले पुण्य के बराबर माना जाता है। जिसके चलते शनिवार को सुबह तीन बजे से ही श्रद्धालु अपने-अपने घरों से निकलकर गंगा के घाटों पर पहुंचने लगे। श्रद्धालुओं ने सरसैया घाट, मैस्कर घाट, परमट घाट व ऐतिहासिक बिठूर घाट पर गंगा स्नान किया और पूजन कर दान पुण्य भी किया। सबसे ज्यादा भीड़ बिठूर घाट पर रही। 

महिलाएं भक्ति गीत गाते हुए पहुंची और स्नान किया। घाटों पर गोदान, अन्नदान और सत्य नारायण व्रत कथा का भी आयोजन हुआ। पूरे घाट गंगा मैया के जयघोष से गुंजायमान रहे। वहीं, मठ-मंदिरों में घंटे-घड़ियाल बजते रहे। इस दौरान भास्कर देव को अधर्य देकर सुख शांति की कामना की। स्नान के बाद गंगा तटों पर ही श्री हरि विष्णु भगवान की पूजा-अर्चना भी की गई।

शाम को सभी घाटों पर दीपदान का भी आयोजन होगा। जिसमें श्रद्धालुओं से लेकर कई सामाजिक संस्थाएं भी भाग लेगीं। बताया जा रहा है कि लगभग एक लाख दीपदान कार्तिक पूर्णिमा पर किया जाएगा।

कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक बंदोबस्त किए गए हैं। श्रद्धालुओं की भीड़ का अंदाजा लगाते हुए हालांकि प्रशासन पहले से ही पूरी तैयारी कर ली थी। सभी गंगा के घाटों पर जल पुलिस को लगाया गया था और घाटों पर भी चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात रही। इसके अलावा सभी घाटों पर लाइट की बेहतर व्यवस्था की गई है। पुलिस के अलावा घाटों पर जिम्मेदार अधिकारी भी पल-पल की जानकारी लेते रहे। डीएम सुरेन्द्र सिंह ने बताया कि लगभग तीन लाख लोगों ने गंगा में स्नान किया। किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई है।

यह है महत्व 

आचार्य रामऔतार पाण्डेय ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा के दिन शाम भगवान श्रीहरि मत्स्यावतार के रूप में प्रकट हुए थे। भगवान विष्णु के इस अवतार की तिथि होने की वजह से आज किए गए दान, जप का पुण्य दस यज्ञों से प्राप्त होने वाले पुण्य के बराबर माना जाता है। पूर्णिमा पर पवित्र नदियों में दीपदान करने की भी परंपरा हैं। कार्तिक पूर्णिमा पर इस बार राजलक्षण योग, रसकेशरी योग, गजकेशरी, आनंद और महापद्म योग का संयोग बना है जो अति फलदायी है।

 गुरु और सूर्य के एक ही राशि में होने से राजलक्षण, शुक्र व चंद्रमा के आमने-सामने रहने से रसकेशरी और गुरु के केन्द्र में चंद्रमा के रहने से गजकेशरी योग का संयोग बना है। इस संयोगों में गंगास्नान और भगवान हरि और शिव की पूजा करने से पूर्व जन्म के साथ इस जन्म के भी सारे पाप नाश हो जाते हैं। बताया कि कार्तिक मास की पूर्णिमा को कार्तिक पूर्णिमा, त्रिपुरी पूर्णिमा या गंगा स्नान के नाम से भी जाना जाता है। क्योंकि आज के दिन ही भगवान भोलेनाथ ने त्रिपुरासुर नामक महाभयानक असुर का अंत किया था और वे त्रिपुरारी के रूप में पूजित हुए थे। ऐसी माना जाता है कि इस दिन कृतिका में शिव शंकर के दर्शन करने से मनुष्य अगले सात जन्म तक ज्ञानी, धनवान और भाग्यशाली होता है।

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