सुसाइड नोट को आत्महत्या के उकसाने का कारण नहीं मान सकते:हाईकोर्ट

0
83

नई दिल्ली : हाईकोर्ट ने कहा है कि एक विवाहित महिला के कुछ परिस्थितियों में आत्महत्या के मामले में उकसाने को मान सकते हैं । जबकि दूसरे अन्य मामलों में आत्महत्या में उकसाने के मामले को मानने का कोई विशेष सबूत होना आवश्यक है।

विद्वान न्यायाधीश ने यह निर्णय तब दिया जब वेस्ट दिल्ली के चार कारोबारियों पर अपने एक कर्मचारी को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले का एक केस चल रहा था। इस निर्णय से चारों कारोबारियों को राहत मिली है। साथ ही न्यायालय ने सम्बंधित अपराध के आरोपी के तौर पर ट्रायल कोर्ट से भेजे गए समन को निरस्त कर दिया है।

न्यायाधीश आरके गाबा की बेंच ने निर्णय सुनाते हुए कहा कि अदालत को अन्य वस्तुओं पर गौर करते हुए मरने वाले की मानसिक स्थिति पर भी विचार करना चाहिए। मुख्य तौर पर सुसाइड नोट की सुक्ष्म जांच होनी चाहिए। सुसाइड नोट के आधार पर उकसाने के नतीजे पर पहुंचने पर गलत ठहराते हुए न्यायालय ने बताया कि तमाम तथ्यों को अध्ययन करने के बाद यह साफ तौर पर नजर आता है कि आत्महत्या या ऐसा करने की कोशिश के कई वजह हो सकती है।

वह उस समय की ज्यादातर मानसिक स्थिति से जुड़े होते हैं। इनमें मुख्य कारण डिप्रेशन, सामाजिक समस्याओं से जुड़ा डर, बायपोलर डिसऑर्डर, आर्थिक, सामाजिक या जीवन के अन्य पहलू हो सकते हैं। न्यायालय ने कहा कि इन मामलों में ऐसा कदम को उठाने के पीछे सुसाइड नोट में जो आरोप लगाए जाते हैं, उससे पीडि़त अन्य मापदंडों की जांच के लिए कोई शंका नहीं छोड़ता, इसीलिए ऐसे सुसाइड नोट की बारीकी से जांच करने की आवश्यकता है

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here