बापू हम बहुत शर्मिंदा हैं….

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रिपोर्ट :- अभय सिंह

वर्ल्ड ख़बर एक्सप्रेस न्यूज़

कानपुर,2अक्टूबर।बापू हम शर्मिंदा हैं जी हां यह पंक्तियां आज के समाज के ऊपर बिल्कुल सटीक बैठती हैं देश की आजादी के लिए अद्वितीय योगदान देने वाले अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी का जन्मदिन आज पूरे भारतवर्ष में मनाया जा रहा है देश के प्रधानमंत्री ने गांधी जयंती पर ही स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की देश क्या विदेश में महात्मा गांधी का नाम आज भी स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है.

जिसने लोगों के अधिकार की बात की आज लोग उसका ही सम्मान नहीं कर पा रहे उसके लिए संस्कारों का पालन नहीं कर पा रहे हैं आज देश के कई जगह से ऐसी तस्वीर निकल कर आई जहां पर बापू का सम्मान करने की दौड़ में सरकारी हुक्मरान के साथ साथ शिक्षक नेता यह भूल गए कि बापू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर देने से बापू खुश नहीं होते हैं हम उनको जो सम्मान दे रहे हैं पर क्या है .

जूते पहनकर बापू की प्रतिमा में माल्यार्पण किया गया फोटो लेने की आपाधापी में नेताजी भूल गए कि उनके पैरों में जूते हैं और वह बापू की प्रतिमा में माल्यार्पण कर रहे हैं

शिक्षा के मंदिर में ही शिक्षा के अगुआ कार भूले बापू के संस्कार

बात नेताओं तक होती तब भी ठीक था पर जब शिक्षा के मंदिर में ही शिक्षा के अग्रदूत यह भूल जाएं कि वह बापू का सम्मान किस रूप में कर रहे हैं तो यह बड़ा ही निराशाजनक है चौबेपुर के सरस्वती एजुकेशन सेंटर स्कूल के प्रबंधक के साथ नेहरू युवा केंद्र की टीम के सदस्यों को भी या याद नहीं रहा कि वह बापू की प्रतिमा में जब माल्यार्पण कर रहे हैं तो उस दौरान ही सही वह अपने जूतों को उतार दें बात तो केवल वहां पर यह थी कि माल्यार्पण की फोटो अच्छी आनी चाहिए बापू की छवि के ऊपर फूल जूते पहन के चढ़ा रहे हैं क्या मतलब।

पुलिसकर्मी भी भूले बापू के सिद्धांत

मोहनदास करमचंद गांधी ने कभी यह नहीं कहा कि मेरा बड़ा सम्मान करो उन्होंने हमेशा का अहिंसा के पद पर चलो लोगों का सम्मान करो लोगों का भला करो देश के लिए तत्पर रहो देश सेवा में लगे पुलिसकर्मी भी आ गए और भूल गए कि बापू की छवि पर माल्यार्पण करते समय कम से कम अपने पैरों में मौजूद जूतों को उतार देते तो शायद उनका सम्मान और बढ़ जाता।

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