सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद केरल HC ने एक लेस्बियन जोड़े को साथ रहने की दी अनुमति

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कोच्चि : केरल हाईकोर्ट ने एक लेस्बियन जोड़े को साथ रहने की अनुमति दे दी है। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की ओर से धारा 377 पर फैसला दिए जाने के कुछ दिन बाद आया है। हाईकोर्ट के जस्टिस अब्दुल रेहिम और जस्टिस केपी नारायण की डिविजन बेंच ने यह फैसला सुनाया।

सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने समलैंगिकता पर ऐतिहासिक फैसला देते हुए भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की सेक्शन 377 के उस प्रावधान को रद्द कर दिया है, जिसके तहत बालिगों के बीच सहमति से समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी में रखा गया था।

हाईकोर्ट कोल्लम जिले की 40 वर्षीय महिला द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था। महिला ने याचिका में आरोप लगाया था कि तिरुवनंतपुरम में उनकी 24 वर्षीय साथी को उसके परिवार ने जबरन बंदी बना कर रखा था। महिला ने अदालत में कहा था।

कि उनकी पार्टनर को परिजनों ने अवैध रूप से बंद कर रखा है। उसे मानसिक और शारिरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। महिला ने अदालत से कहा कि उसके पार्टनर को मानसिक बीमार बताते हुए मेंटल हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया गया।

याची महिला ने अपने पार्टनर की जान को खतरा भी बताया था। 40 वर्षीय महिला ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के अनुसार, याचिकाकर्ता और उसके पार्टनर को जीवन साथी के रूप में एक साथ रहने की हकदार है।

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