ताड़ोकी : ‘नक्सली तांडव’, बेटे की हत्या कर पिता की पिटाई

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कांकेर,18सितम्बर।अपने आप को गरीबों का मसीहा बताने वाले नक्सलियों ने ताड़ोकी थाना के आमागांव में एक गरीब वाहन चालक की निर्ममता से हत्या कर दी। साथ ही उसके पिता की बेदम पिटाई की। पिटाई से घायल पिता को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जिले में मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह के प्रवास के 48 घंटों के भीतर ही नक्सलियों ने सिर्फ अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने के लिए गरीब वाहन चालक गैंदलाल जैन की घर से निकालकर हत्या कर दी और बेटे के प्राणों की रक्षा के लिए हाथ जोड़कर विनती करने वाले बुजुर्ग पिता दयालुराम जैन को इतनी बेरहमी से पीटा की वह उठ-बैठ नहीं पा रहा है। अंतागढ़ अस्पताल में उनका इलाज कराया जा रहा है।
आमागांव के ग्रामीणों ने बताया कि रविवार की रात करीब 10 बजे 25-30 हथियारबंद नक्सली गैंदलाल के घर आ धमके। आधी रात काफी लोगों की आवाज और शोर गुल सुनकर पहले गैंदलाल झांक कर देखा तो मौत के रूप में नक्सली उसके दरवाजे पर खड़े थे। वहीं नक्सलियों को देख 34 वर्षीय पुत्र गैंदलाल घर में ही छिपने लगा लेकिन नक्सलियों ने उसे घसीटकर बाहर निकाल लिया। यह सब देखकर परिवार वालों के होश उड़ गए। अपने बेटे को बचाने 60 वर्षीय बुजुर्ग दयालुराम भी नक्सलियों के पास दौड़ा और हाथ जोड़कर विनती करने लगा कि मेरे बेटे के साथ मारपीट ना करे।
बुजुर्ग की प्रार्थना का नक्सलियों पर कोई असर नहीं पड़ा। उलटे घर वालों के सामने ही गैंदलाल की पिटाई की। यह सब दयालू को देखा ना गया और उसने कहा कि मेरा बेटा निर्दोष है इस पर नक्सलियों ने उसे लाठियों और बंदूक के कुंदे से बेरहमी से पीटा। गांव वालों के अनुसार कुछ लोगों के सामने कथित तौर पर जनअदालत लगाई गई और धारदार हथियार से गैंदलाल को तब तक गोदा गया जब तक उनकी मौत न हो गई। जाते-जाते नक्सलियों ने पुलिस के साथ जुड़ने और काम करने वालों का यही हश्र करने की धमकी दी और गांव से बाहर सड़क पर युवक गैंदलाल का शव फेंक दिया। गांव के लोगों ने बताया कि गैंदलाल ने कभी भी पुलिस की मुखबीरी नहीं की। वह टैक्सी चलाकर अपने घर वालों का पालन-पोषण करता था। उसके दो संतान हैं और पत्नी गर्भवती है। परिजन अब तक सदमे में है।
टैक्सी चलाने के कारण युवक ताड़ोकी, अंतागढ़ जाया करता था, जिससे नक्सलियों को यह डर सताने लगा था कि हमारी जानकारी गैंद के जरिए बाहर पहुंच रही है। वहीं बुजुर्ग दयालु को भी मुखबीर कहकर पीटा गया। जबकि खेत और गांव से बाहर ना जा सकने वाले दयालुराम की मुखबीरी करने का प्रश्न ही नहीं उठता। नक्सलियों ने हत्या करने का प्लान पहले से ही बनाकर रखा था। पहले युवक की हत्या की और शव जहां फेंका उससे कुछ ही दूरी पर लाल रंग के कपड़े में धमकी भरी कुछ लाइन लिखी थी। जिसमें पुलिस के लिए काम करने वालों का यही हश्र करने की धमकी दी गई।
मगर स्थानीय ग्रामीण नक्सलियों की इस धमकी से डरने के बजाए आक्रोशित नजर आए। युवाओं का कहना था कि रोजी-रोटी के लिए कुछ काम करने से नक्सलियों को अपना अस्तित्व बचाने की चिंता सताती है। मुखबिर शब्द नक्सलियों की मानसिक विकार का परिचायक है। जो भी युवा आगे बढ़ना, पढ़ना और घर का आर्थिक स्तर सुधारना चाहते हैं उन्हें नक्सली नहीं पचा पाते। घटना की जांच की जा रही है। किसकोड़ो एरिया कमेटी के नक्सली मानू दुग्गा और सहदेव के नामों की इस घटना में लिप्त होने की जानकारी मिली है। जुर्म दर्ज कर नियमानुसार कार्रवाई भी की जाएगी।

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