यूपी में थिरकेंगे डांसिंग डियर …

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लखनऊ,9सितंबर। देश में लुप्तप्राय हिरण प्रजाति संघाई पर शोध करने वाले जंतु विज्ञानी डॉ. जितेंद्र कुमार शुक्ला एवं प्रोफेसर वी.पी. सिंह ने उत्तर प्रदेश में इनके प्रजनन और सरंक्षण की आवश्यकता जताई है। इस सम्बन्ध में उन्होंने प्रदेश के जंतु उद्यान मंत्री दारा सिंह चैहान को अपने शोध का ब्यौरा देकर उन्हें संदर्भित शोध की प्रति भेंट की। जंतु उद्यान मंत्री श्री चैहान ने जंतु विज्ञानी डॉ. शुक्ला के शोध की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश में संघाई हिरणों के प्रजनन और सरंक्षण के लिए सरकार शीघ्र ही प्रभावी कदम उठाएगी। इस अवसर पर डॉ. शुक्ला ने बताया कि वर्ष 1951 में संघाई हिरण को विलुप्तप्राय घोषित किया गया था। उन्होंने बताया कि संघाई हिरण को थामिन डियर के नाम से भी जाना जाता जाता है। इसके सींगों कि विशेष बनावट होती है। इस कारण इसे ब्रोइंटेलर डियर के नाम से भी पुकारा जाता है। यह हिरण तमाम अवसरों पर अपने आगे के दोनों पैरों को हवा में उठा लेता है। ऐसा लगता है कि मानों यह नाच रहा हो। इस वजह से इसे डांसिंग डियर या नाचता हुआ हिरण भी कहते है।जंतु विज्ञानी डॉ. शुक्ला ने बताया कि यह मणिपुर का राज्य पशु है। इसका पर्यावास मुख्य रूप से वहां के जंगलों और झीलों में है। कानपुर प्राणि उद्यान में इस प्रजाति के 11 नर और 3 मादा हैं। यहाँ दो मादा संघाई हिरणों को मंगाया जाना प्रस्तावित है। अपने शोध स्टेटस इकोलॉजी एंड एक्स सी टू कंजर्वेशन ऑफ ब्रो एंटलर्ड डियरश् कि चर्चा करते हुए डॉ. शुक्ला ने बताया कि उन्होंने संघाई डियर पर वर्ष 2008 से प्रोफेसर वी.पी. सिंह के निर्देशन में शोध प्रारम्भ किया था। शोध के दौरान उन्होंने पाया कि दुनिया में इस हिरण के अस्तित्त्व पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। इनकी संख्या लगातार तेजी से घट रही है। वर्ष 1950 में इनके पर्यावास पूर्णरूपेण विलुप्त हो गए थे। किन्तु वर्ष 1975 के आते-आते संघाई हिरण अपने पर्यावास में पुनः देखे गए। उस समय इनकी संख्या मात्र 14 थी। संरक्षण के प्रयासों के फलस्वरूप इनकी संख्या मौजूदा समय में 260 है। डॉ. शुक्ला ने बताया कि हिरण कि यह प्रजाति अत्यंत आकर्षक है। मणिपुर में इसके लिए श्संघाई मेलेश् और श्संघाई दिवसश् का आयोजन किया जाता है। भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी संघाई मेले में शिरकत कर चुके हैं। डॉ. शुक्ला ने बताया कि जंतु उद्यान मंत्री श्री चैहान ने प्रदेश में संघाई हिरणों के समुचित सरंक्षण और विकास के लिए आश्वस्त किया है। इसके लिए शीघ्र ही विशेषज्ञों के साथ परामर्श कर प्रजनन और संरक्षण के प्रयासों को गति प्रदान की जाएगी। जंतु उद्यान मंत्री से भेंट कर संघाई डियर पर चर्चा करने वाले जंतु विज्ञानियों में डॉ. शुक्ला के अतिरिक्त प्रोफेसर वी.पी.सिंह, जंतुप्रेमी रणविजय सिंह आदि के नाम उल्लेखनीय हैं।

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