स्वास्थ्य खतरे होंगे कम, अब रीयल-टाइम में भूजल के प्रदूषण का पता लगाया जा सकेगा

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वाशिंगटन,6सितंबर।वैज्ञानिकों ने एक ऐसा किफायती तरीका विकसित कर लिया है, जिसकी मदद से रीयल-टाइम में भूजल के प्रदूषण का पता लगाया जा सकेगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे स्वास्थ्य खतरों को कम करने में मदद मिलेगी। अमेरिका स्थित लॉरेंस बर्कले नेशनल लैबोरेटरी के शोधकर्ताओं के मुताबिक, भूजल प्रदूषण को एक व्यापक पर्यावरणीय समस्या के रूप में देखा जा रहा है। दुनिया भर में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। इसमें सबसे बड़ी परेशानी प्रदूषण की जांच में लगने वाला बहुत अधिक समय है। बर्कले लैब में शोधकर्ता हरुको वाइनराइट ने कहा, निगरानी के पारंपरिक तरीकों के तहत पानी के नमूने हर साल या हर तिमाही में लिए जाते हैं और उन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजा जाता है।
अगर पानी बहुत अधिक प्रदूषित होता है तो भी इसका पता लगाने में समय लग जाता है। इसके चलते इसका उपभोग जारी रहता है, जो स्वास्थ्य के लिए खतरा बनता है। एनवायरमेंटल साइंस एंड टेक्नोलॉजी नामक जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, शोधकर्ताओं ने इस समस्या के समाधान के लिए नई विधि ईजाद की है। शोधकर्ताओं ने अमेरिका में दक्षिण कैरोलिना में एक पूर्व परमाणु हथियार उत्पादन स्थल, सवाना नदी साइट पर भूजल में ट्रिटियम और यूरेनियम -238 के स्तर को ट्रैक किया। उन्होंने अम्लता (पीएच) को मापा। शोधकर्ताओं ने पाया कि इस विधि के जरिये रीयल-टाइम में पानी में पीएच स्तर का पता लगाया जा सकता है।

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