महाशिवरात्रि पर जानें अपनी राशि के अनुसार कैसे करें पूजा व पूजा का शुभ मुहूर्त

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आज महाशिवरात्रि का पावन पर्व है। आज फाल्गुन मास की प्रदोष व्यापीनी कृष्ण चतुर्दशी के उपलक्ष्य में महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाएगा। पौराणिक मान्यतानुसार महाशिवरात्रि पर्व वैदिक काल से ही मनाया जाता है। इस व्रत व पर्व का पालन देवी लक्ष्मी, सरस्वती, गायत्री, सीता, पार्वती व रति ने विधिवत किया था। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाने वाली महाशिवरात्रि शिव-शक्ति के मिलन का पर्व है।

शिव की उत्पत्ति का दिन है महाशिवरात्रि

मान्यतानुसार महाशिवरात्रि के प्रदोषकाल में शंकर-पार्वती का विवाह हुआ था। प्रदोष काल में महाशिवरात्रि तिथि में सर्व ज्योतिर्लिंगों का प्रादुर्भाव हुआ था। शास्त्रनुसार सर्वप्रथम ब्रह्मा व विष्णु ने महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पूजन किया था। पौराणिक मान्यतानुसार दिव्य ज्योर्तिलिंग का उदभव भी महाशिवरात्रि पर्व पर माना जाता है व इसी दिन को ही शिव उत्पत्ति के रूप में मानते हैं। महाशिवरात्रि की उपासना तन, मन और धन से जुड़ी कामनाओं में आने वाली बाधाओं को दूर करती है। दु:ख, दरिद्रता व धन के अभाव को दूर कर धन, संतान, निरोगी काया प्रदान कर वैभवशाली व संपन्न बनाती है।

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ये है पूजा का शुभ मुहूर्त

आज मंगलवार 13.02.18 को महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में रात्रि जागरण, रात्रि पूजन व व्रत का पालन किया जाएगा। चतुर्दशी तिथि दी॰ 13.02.18 को रात 22:34 से प्रारंभ होकर अगले दिन बुधवार दि॰ 14.02.18 को रात 00:46 तक रहेगी। अतः महा शिवरात्रि के व्रत का पारण बुधवार दि॰ 14.02.18 को प्रातः 07:04 से शाम 15:20 तक रहेगा। अतः बुधवार दि॰ 14.02.18 को चतुर्दशी के उपलक्ष्य में शिवालयों व मंदिरों में विशेष पूजा अभिषेक व अर्चन किया जाएगा परंतु शिवरात्रि व्रत, जागरण व निशीथ पूजन मंगलवार दि॰ 13.02.18 को ही मान्य होगा। प्रदोष काल पूजन मुहूर्त शाम 18:05 से रात 21:20 तक रहेगा । संधि काल पूजन मुहूर्त रात 22:00 से रात 23:00 तक रहेगा। निशीथ काल का पूजन मुहूर्त रात 00:09 से रात 01:01 तक रहेगा।

महाशिवरात्रि की विशेष पूजन विधि

शिवरात्रि के प्रदोष काल में शिवलिंग को जल, दूध, बिल्वपत्र और सफेद आंकड़ा समर्पित करें तत्पश्चात शिवलिंग पर धूप, दीप गंध, पुष्प दूध, अक्षत, धतूरा, बिल्वपत्र व नैवेद्य अर्पित कर पंचोपचार पूजन करें तथा चंदन की माला से इस विशेष मंत्र का 1 माला जाप करें। पूजन के बाद नैवेद्य सभी में वितरित कर दें।

पूजन मंत्र

‘श्रीं शितिकण्ठाय नमः शिवाय श्रीं’ मंत्र का पूजा के बाद जाप करें।

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समस्याओं से मुक्ति हेतु करें ये विशेष उपाय

निरोगी काया की प्राप्ति हेतु शिवलिंग पर शहद से अभिषेक करें। धन के अभाव से मुक्ति हेतु शिवलिंग पर चढ़े सिंदूर से घर के मेन गेट पर “श्रीं” लिखें। दरिद्रता से मुक्ति हेतु शिवलिंग पर चढ़ा चांदी का सिक्का तिजोरी में रखें।

अपनी राशि के अनुसार ऐसे करें पूजा

मेष- इस राशि के स्वामी मंगल देव है, इनके लिए लाल रंग शुभ माना जाता है। मान्यता है कि शिवरात्रि के दिन लाल चंदन और लाल रंग के पुष्प इस राशि के लोग भगवान शिव को अर्पित करें तो ये व्रत उनके लिए अधिक फलदायी हो जाता है। पूजन के दौरान इस राशि के जातकों को नागेश्वराय नमः का जाप करना चाहिए, इससे भगवान शिव प्रसन्न होकर संकटों से मुक्त करते हैं।

वृषभ- भगवान शिव के वाहन वृषभ है। इस राशि का स्वामी शुक्र को माना जाता है। सफेद रंग इनके लिए शुभ हो सकता है। इस कारण से सफेद चमेली के फूलों से भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए।

मिथुन- इस राशि का स्वामी बुध को माना जाता है। मिथुन राशि के लोगों को भगवान शिव को धतूरा, भांग अर्पित कर सकते हैं। पंचाक्षरी मंत्र ऊं नमः शिवाय का पाठ लाभकारी माना जाता है।

कर्क- इस राशि के स्वामी चंद्रमा है जिन्हें भगवान शिव ने अपनी जटाओं में धारण कर रखा है। कर्क राशि के जातकों को शिवलिंग का अभिषेक भांग मिश्रित दूध से करना चाहिए।

सिंह- इस राशि के स्वामी सूर्य देव माने जाते हैं। भगवान शिव की आराधना में सिंह राशि के लोगों को कनेर के लाल फूल अर्पित करने चाहिए। भगवान शिव के सामने बैठकर शिव चालीसा का पाठ करना इनके लिए लाभकारी माना जाता है।

कन्या- इस राशि का स्वामी बुध को माना जाता है। कन्या राशि के लोग भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, भांग आदि सामग्री शिवलिंग पर अर्पित कर सकते हैं। ऊं नमः शिवाय का पाठ करना इनके लिए लाभकारी हो सकता है।

तुला- इस राशि का स्वामी शुक्र को माना जाता है। मिश्री युक्त दूध से शिवलिंग का अभिषेक करना लाभकारी हो सकता है। शिव के सभी नामों का जाप करते हुए दुध अर्पित करें।

वृश्चिक- इस राशि के स्वामी भौमेय मंगल को माना जाता है। इस राशि के लोगों को गुलाब के फूलों और बिल्वपत्रों की जड़ से करनी चाहिए। रुद्राष्टक का पाठ करना इस राशि के लोगों के लिए शुभ हो सकता है।

धनु- इस राशि का स्वामी बृहस्तपति देव को माना जाता है। इन्हें पीला रंग प्रिय होता है। धनु राशि के लोगों को पीले फूलों से भगवान शिव का पूजन करना चाहिए। प्रसाद के रुप में खीर का भोग लगाना चाहिए।

मकर- इस राशि का स्वामी शनि को माना जाता है। धतूरा, भांग, अष्टगंध आदि से भगवान शिव की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है। पार्वतीनाथाय नमः का पाठ करना इस राशि के लोगों के लिए लाभदायक माना जाता है।

कुंभ- इस राशि के स्वामी शनि देव हैं। गन्ने के रस से इस राशि के लोगों को शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए। धन लाभ की इच्छा करने वाले इस राशि के लोगों को शिवाष्टक का पाठ करना चाहिए।

मीन- इस राशि के स्वामी बृहस्पतिदेव हैं। पंचामृत, पीले रंग के फूलों से इस राशि के लोग भगवान शिव को प्रसन्न कर सकते हैं। 108 बार ऊं नमः शिवाय का पाठ इनके लिए लाभकारी हो सकता है।

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