भाजपा के चहेते पूंजीपतियों के धन में 50 प्रतिशत की हुई वृद्धि-मायावती

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लखनऊ, 01 जुलाई। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने कहा कि भाजपा के चेहेते भारतीय पूंजीपतियों के धन में 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार लेना पसन्द नही करेगी। मायावती रविवार को भाजपा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर जमकर बरसीं। उन्होंने अपनी बातों को प्रश्नों के माध्यम से रखते हुए कहा कि स्विट्ज़रलैण्ड के बैंकों में बड़े-बड़े पूंजीपति अपना धन रखने को अपनी शान समझते हैं, वहां भाजपा के चहेते भारतीय पूंजीपतियों के धन में 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

अब क्यों नहीं भाजपा और प्रधानमंत्री व उनकी सरकार इसका श्रेय ले रहें हैं। वैसे देशहित का मूल प्रश्न यह है कि भारत में कमाया गया धन आजकल विदेशी बैंकों में क्यों है? उन्होंने तीखे प्रश्न करते हुए कहा कि देश की सवा सौ करोड़ गरीब व मेहनतकश आम जनता है। भाजपा सरकार की नीतियों से अमीर लोग और ज्यादा धनवान तथा गरीब, मजदूर व किसान आदि और भी ज्यादा दुःखी व परेशान क्यों होते जा रहे हैं। क्या यही भाजपा के लिये देशहित की बात है व उसकी सच्ची देशभक्ति की मिसाल है। उन्होंने कहा कि मीडिया का कहना है कि कालाधन पर अंकुश लगाने की नरेन्द्र मोदी सरकार के दावों की इससे पोल खुल गई है, परन्तु जनहित का प्रश्न यह है कि भारतीय धन्नासेठों के धन में इतनी ज्यादा वृद्धि कैसे व कहां से हुई है तथा इस सम्बन्ध में केन्द्र सरकार की नीयत, उनकी नीति व बड़े-बड़े दावों का क्या हुआ? उन्होंने कहा कि क्या इसीलिये भाजपा की केन्द्र व राज्य सरकारें प्राइवेट सेक्टर को अंधाधुंध बढ़ावा दे रही हैं, जहां समाज के उपेक्षितों, दलितों, पिछड़ों आदि की हमेशा से उपेक्षा व तिरस्कार है।

इसके अलावा भारतीय रुपये का लगातार अवमूल्यन व भारतीय पासपोर्ट की अहमियत ख़ासकर अमेरिका में लगातार क्यों कम होती जा रही है, सरकार को इस बात का भी जवाब जनता को ज़रुर देना चाहिये। बसपा सुप्रीमो ने कहा कि ऐसे समय में जबकि भारतीय मुद्रा का ऐतिहासिक अवमूल्यन हुआ है और देशवासी इससे काफी विचलित हैं। मूल प्रश्न यह है कि केन्द्र सरकार जानलेवा महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी व अशिक्षा आदि की राष्ट्रीय समस्या को क्यों नहीं रोक पा रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बयान ”सत्ता के लिये एक साथ हो रहे हैं” पर मायावती ने कहा कि घोर जातिवादी, जनविरोधी व अहंकारी भाजपा सरकारों के खिलाफ विपक्षी पार्टियों का एकजुट होना जनहित का बड़ा काम है। इससे भाजपा के पेट में दर्द होना स्वाभाविक है, यह जनता खूब अच्छी तरीके से समझ रही है। परन्तु उन्हें इस बात पर गौर करना चाहिये कि उनकी जनविरोधी नीतियों के कारण ही उनके गठबन्धन के दल उन्हें पानी पी-पी कर कोस रहे हैं और उनसे एक-एक करके अलग भी होते चले जा रहे हैं।

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