कबीर के जन्म दिन पर पीएम मोदी के मगहर जाने पर विवाद

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नई दिल्ली, 27 जून । अवैध कब्जों को लेकर पहले से विवादित मगहर (संतकबीर नगर) का कबीर मठ, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यक्रम के चलते और विवादों में आ गया है। जिस संत कबीर दास का 640वां जन्मदिन 28 जून को मनाया जा रहा है। जो इसी दिन वाराणसी के लहरतारा में तालाब की सीढ़ी पर नवजात शिशु के रूप में स्वामी रामानन्द को मिले थे, जो अपने अंतिम समय में काशी (वाराणसी) छोड़कर मगहर (संत कबीर नगर) चले गये थे | वहां वे करीब तीन साल रहे और वहीं उनका देहावसान भी हुआ। जो कबीर दास , मठ , मस्जिद , मंदिर बनाने के विरोधी थे। कबीर कहते थे, “जो घर फूंको आपनो, चलो हमारो साथ”।

उसी संत कबीर दास के नाम पर बने मठों और जमीन पर कब्जे को लेकर बहुत ही विवाद है। देश भर में फैले ऐसे मठों में से एक मगहर वाले मठ के प्रभारी विचार दास हैं, जो कबीर मठ सारनाथ की जमीन अवैध रूप से बेचने के मामले में 2016 में 17 दिन जेल में रहे थे और अभी जमानत पर हैं। कबीर मठ वाराणसी के प्रधान महंत हैं विवेक दास, जिनके अधीन कबीर मठ मगहर भी है । इन्होने ही विचार दास को संत कबीर नगर जिले के मगहर मठ का प्रभारी बनाया है। उन्होंने इस बारे में पूछने पर कहा, “सारनाथ वाले मठ की जमीन अवैध रूप से बेचने के मामले में जेल में रहे विचार दास फिलहाल जमानत पर हैं । जमानत पर रिहा होने के बाद मुझसे गिड़गिड़ाने लगे कि उनको मगहर वाले मठ में भेज दिया जाये , वहां का वह काम देखेंगे। मैने भेज दिया और कहा कि सुधर जाओ , फिर सारनाथ वाला काम नहीं करना । लेकिन वह मगहर में स्थानीय भाजपा सांसद के साथ मिलकर मठ व उसकी जमीन पर सांसद का कब्जा कराने की कोशिश शुरू कर दी ।

इसी योजना के तहत संत कबीर नगर के सांसद शरद त्रिपाठी ,मगहर में जहां कबीर दास जी मरे थे, वहां उनके जन्म दिन 28 जून को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में कार्यक्रम करा रहे हैं। महंत विवेक दास का कहना है कि उ.प्र. या केन्द्र सरकार ने मुझसे मगहर मठ की जमीन पर कबीर अकादमी या कबीर शोध संस्थान बनाने के लिए अनुमति नहीं ली है। वे राज्य या केन्द्र सरकार की जमीन पर कुछ भी करने, बनाने के लिए स्वतंत्र हैं । लेकिन वे हमारे मठ की जमीन पर कुछ बनाने की योजना कैसे बना रहे हैं। इस पर मैं आसानी से उच्च न्यायालय से स्टे ले लूंगा।

विवेकदास का कहना है, “मुझको लगता है कि प्रधानमंत्री को उनकी पार्टी के नेताओं ने गुमराह किया है। कोई भी मगहर में कबीरदास का जन्मदिन मनाने नहीं जाता है, लेकिन प्रधानमंत्री वहां 28 जून को ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन जायेंगे, जिस दिन संत कबीर दास वाराणसी में पैदा हुए थे”। कबीर मठ वाराणसी के प्रमुख महंत विवेकदास का कहना है, “कबीर दास वाराणसी में पैदा हुए थे और यहां ( कबीर मठ ,वाराणसी ) उनका प्रकटोत्सव मंगलवार 26 जून से ही मनाया जाना शुरू हो गया है। मगहर कबीर मठ में जन्मोत्सव मनाने का कोई मतलब नहीं है”। विवेक दास कहते हैं, “मैं काशी और मगहर के मठ का प्रधान महंत हूं , मेरी अनुमति के बिना मगहर के कबीर मठ में इस तरह का कोई आयोजन नहीं होना चाहिए”।

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