अटल बिहारी बाजपेई के स्वस्थ होने की कामना कर डीएवी कालेज में हुई पूजा

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कानपुर, 12 जून । कानपुर के डीएवी कॉलेज के छात्र रहे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई के एम्स में भर्ती होने की खबर पर स्टॉफ, छात्र और पूर्व छात्रों ने कॉलेज में ही बने हनुमान मंदिर में पूजा कर उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। इसके साथ ही उनके चाहने वाले कानपुरवासियों ने आनन्देश्वर मंदिर में दीर्घायु यज्ञ किया। तो वहीं रोजेदारों ने भी उनकी सलामती के लिये दुआ की।

भारतीय जनता पार्टी के कर्ता धर्ता व 93 वर्षीय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई पिछले कई सालों से से बीमार चल रहें हैं। जिनका इलाज लगातार डाक्टर उनके निवास में ही करते थे, लेकिन सोमवार को उन्हें कुछ दिक्कत हुई जिसके कारण अटल जी को डाक्टरों ने दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया। एम्स में भर्ती होने की खबर पर उनके चाहने वालों में निराशा छा गयी और दुआओं का दौर शुरू हो गया। इसी क्रम में कानपुर के डीएवी कॉलेज में मंगलवार को कॉलेज का स्टॉफ, छात्र और पूर्व छात्रों ने कॉलेज में बने हनुमान मंदिर में पूजा पाठ कर ईश्वर से कामना की गई कि बाजपेई जी जल्द स्वस्थ हो जायें। इस दौरान छात्रों ने अटल बिहारी जिंदाबाद के नारे भी लगायें।

डीएवी के पूर्व छात्र और भाजपा नेता अजय अग्निहोत्री ने बताया कि हमारे कॉलेज के पूर्व छात्र और देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई जी जो एम्स में भर्ती हैं। जिसकी सूचना हमें चैनलों के माध्यम से मिली। इसीलिये हम लोग हनुमान मंदिर में पूजा करके उनके जल्द ठीक होने की प्रार्थना करते हैं। बताया कि बाजपेई जी इसी कॉलेज से राजनीति शास्त्र की शिक्षा ग्रहण की थी। छात्र विनय कुमार ने कहा कि भारतीय राजनीत के भीष्म पितामह माननीय अटल बिहारी जी के जल्द ठीक होने के लिए पूजा की गयी है। इसी तरह आनंदेश्वर मंदिर में उनके चाहने वालों ने दीर्घायु यज्ञ कर शुरू पूर्व प्रधानमंत्री के जीवन की सलामती के लिए प्रार्थना की गयी।

यज्ञ को सम्पन्न कराने वाले पंडित राम औतार पाण्डेय ने बताया कि इस यज्ञ से बीमार को आयु प्राप्त होती है व स्वास्थ्य ठीक हो जाता है। भाजपा नेता कृष्ण कुमार दीक्षित ने कहा कि उनकी प्रेरणा से हम सब को नई ऊर्जा मिलती है। कहा, अटल जी पैदा जरूर मध्य प्रदेश में हुये हैं पर उनकी राजनीति की महत्वपूर्ण शिक्षा कानपुर से ही हुई है और उनका राजनीतिक जीवन भी उत्तर प्रदेश ही रहा है। तो वहीं इन दिनों रोजा चल रहा और अटल बिहारी बाजपेई के अस्वस्थ होने की जानकारी पर उनके चाहने वाले रोजेदारों ने मस्जिदों में जाकर अटल जी के जल्द ठीक होने के लिए नमाज अदा कर अल्ला-ताला से दुआ मांगी।

चमनगंज के इब्ने हसन जैदी ने बताया कि हमारे परिवार में सभी लोग रोजा रखे हुयें हैं और हम लोगों ने अटल जी के स्वस्थ होने की अल्ला ताला से दुआयें मांगी है। उन्होंने अपने बचपन के दिनों को याद करते हुये बताया कि एक बार अटल जी कानपुर के फूलबाग मैदान पर आये थे और उनके भाषण सुनकर हमारे पिता रो पड़े थे। उसी दिन से हमारे पिताजी ने तय कर लिया था कि अटल जी ने जो कविताओं के जरिए लोगों को नेकी पर चलने का रास्ता दिखाया है इसी पर आगे चलना है।

कानपुर से अटल जी का था गहरा नाता
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई का जन्म मध्य प्रदेश के ग्वालियर में हुआ था। अटल जी की बीए की शिक्षा ग्वालियर के विक्टोरिया कालेज (वर्तमान में लक्ष्मीबाई कालेज) में हुई। छात्र जीवन से वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक बने और तभी से राष्ट्रीय स्तर की वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में भाग लेते रहे। बीए करने के बाद अटल जी कानपुर आ गये और डीएवी कालेज से राजनीति शास्त्र में एम०ए० की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। उसके बाद उन्होंने अपने पिता कृष्ण बिहारी बाजपेई के साथ-साथ कानपुर में ही इसी कॉलेज से एलएलबी में दाखिला लिया।

डीएवी कालेज के प्राचार्य डा. अमित श्रीवास्तव ने बताया कि जिस समय अटल जी यहां पर शिक्षा ग्रहण की है उस समय यह कॉलेज आगरा विश्विद्यालय से संबंद्ध था। बताया कि बाजपेयी जी यहां लगभग चार साल तक शिक्षा ग्रहण की। सबसे पहले उन्होंने यहां से 1945-46, 1946-47 के सत्रों में राजनीति शास्त्र से परास्नातक किया। इसके बाद 1948 में अपने पिता कृष्ण बिहारी बाजपेई के साथ एलएलबी में प्रवेश लिया लेकिन 1949 में संघ के काम के चलते उन्हे लखनऊ जाना पड़ा और एलएलबी की पढ़ाई बीच में ही छूट गई। जबकि उनके पिता ने एलएलबी की पूरी पढ़ाई की। कॉलेज में आज भी राजनीति शास्त्र विभाग में अटल की फोटो श्रेष्ठ छात्रों के रूप में लगी हुई है। यही नहीं सक्रिय राजनीति में आने के बाद जब भी उनका कानपुर दौरा लगता था जो अपनी पुरानी यादों को मंच से कहने में कोई गुरेज नहीं करते थे।

पत्र के जरिये कॉलेज की यादों का किया जिक्र
कॉलेज के पूर्व प्रोफेसर सुमन निगम ने बताया कि जब बाजपेई जी तीसरी बार प्रधानमंत्री बने तो कॉलेज के नाम एक पत्र लिखा था जो साहित्य सेवी बद्रीनारायण तिवारी ने संस्थान को सौंप दिया। उस पत्र में उन्होंने अपनी यादगार कुछ रोचक और गौरवान्वित कर देने वाली घटनाओं का जिक्र किया है। जिसमें सबसे महत्वपूर्ण कॉलेज में मनाया गया आजादी का जश्न था। अटल जी ने लिखा कि 15 अगस्त 1947 को छात्रावास में जश्न मनाया जा रहा था। जिसमें अधूरी आजादी का दर्द उकेरते हुए मैने एक कविता सुनाई। उस कविता को सुनकर समारोह की अध्यक्षता कर रहे आगरा विश्वविद्यालय के तत्कालीन उप कुलपति लाला दीवानचंद ने 10 रुपये इनाम दिया था। जिसको लेकर कॉलेज ही नहीं पूरे कानपुर में उस दौरान चर्चा का विषय बना रहा।

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