ऋषिकेश: सरकार को दिखाया आईना, किसानों ने शुरू किया बांध मरम्मत का कार्य

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रिपोर्ट :मोहित शर्मा
ऋषिकेश ,12जून। ग्राम सभा खड़क माफ़ स्थित खादर क्षेत्र के किसान सरकार की उदासीनता के कारण हर छह माह के बाद सिंचाई के लिए पानी की आपूर्ति के लिए बंगाला नाले पर बने अधूरे बांध को बनाने को लाचार हैं।
उल्लेखनीय है कि खदरी के हजारों बीघा खेती बंगाले नाले के पानी की आपूर्ति पर ही निर्भर करती है। आजतक सिंचाई के लिए योजना बद्ध पक्के चैनल वाले बांध का निर्माण आजादी के 70 वर्षो बाद भी नहीं हो पाया है। जिसके कारण वर्षा ऋतु आने पर नाले के जल स्तर में वृद्वि होने पर ग्रामीणों द्वारा बनाया जाने वाला अस्थाई बंधा टूट जाता है । हर छमाही फसल पर ग्रामीण किसानों को कड़ी मेहनत कर बांध बनाना उनकी लाचारी है। स्थानीय ग्रामीण शूर वीर सिंह जेठुड़ी का कहना है कि परेशानियों का सबब बने बांध और जँगली जानवरों से फसल नुकसान के कारण लोग अपने खेत बेच रहे हैं और अगली पीढ़ी खेती से विमुख हो रही है। मंगलवार की सुबह पंचायत सदस्य मंगनी राम रयाल और पर्यावरण विद् विनोद जुगलान के नेतृत्व में खादर के किसानों ने बड़ी संख्या में एकत्र होकर घास पत्तियों सहित रेत बजरी के बोरों से बांध मरम्मत का कार्य किया। जहां एक ओर किसानों ने बंगाला नाले पर बने आधे अधूरे बन्धे पर पानी में घुस कर रेत की बोरियाँ और पत्थर लगाकर पानी रोकने का सफल प्रयास किया, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण महिलाओं ने घास और गुटेल की पत्तियों का सँग्रह कर पुरुषों का साथ निभाया।
ग्रामीण महिला बिस्सी देवी का कहना है कि बांध बनाने में सहयोग करने हेतु महिलाओं की बड़ी संख्या में सहभगिता इस बात का उदाहरण हैं कि ग्रामीण महिलाएं किसी भी क्षेत्र में अब पीछे नहीं हैं। पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता विनोद जुगलान का कहना है कि ग्रामीण इस पानी का उपयोग धान की पौध की सिंचाई के लिए करें और अभी रोपाई करना जल्दबाजी होगी मानसून पूर्व की रोपाई से फसल सिंचाई के लिए अधिक पानी की आवश्यकता होती है और धान की ऊपज पर भी असर पड़ता है। उन्होंने मानसून आने के बाद ही फसल रोपाई की अपील की है ताकि किसानों को अच्छी उपज मिल सके। आज खादर की सिंचाई हेतु बन्धे पुनर्निर्माण में जुटे किसानों में महिलाओं का अधिक योगदान रहा जिनमें बिस्सी देवी, बिंदेश्वरी देवी, मातबरी देवी, निर्मला, कमला, विमला, पूजा, परमेश्वरी, भूमा, उज्जा देवी, बसन्ती, चम्पा देवी, जुगलान आदि प्रमुख रूप से सम्मिलित रहे। ग्रामीणों ने सरकार से चैनल बांध बनाने की मांग की है।

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