मानसरोवर यात्रा का पहला जत्था रवाना, विदेश राज्यमंत्री ने दिखाई हरी झंडी

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नई दिल्ली, 11 जून। विदेश राज्यमंत्री वीके सिंह ने मानसरोवर यात्रा-2018 के पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाई। मानसरोवर यात्रियों का पहला जत्था लिपुलेख दर्रे से मानसरोवर तक जाएगा। इस जत्थे में 58 यात्री जा रहे हैं। इस वर्ष मानसरोवर यात्रा 08 जून से 08 सितम्बर के बीच आयोजित की जा रही है। विदेश मंत्रालय हर साल इस यात्रा का आयोजन करता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि मानसरोवर यात्रा के दो रास्ते तय किए गए हैं। एक रास्ता उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से होकर जाता है, जिसमें यात्रियों को कुछ दूरी तक पहाड़ चढ़ना पड़ता है। इस रास्ते से हर यात्री का खर्च 01 लाख 60 रुपये तक आता है।

इस बार इस रास्ते से मानसरोवर यात्रियों के 18 बैच जाएंगे, जिसमें हर बैच में 60 यात्री होंगे। हर बैच को मानसरोवर यात्रा में 24 दिन लगेंगे। यात्रा की शुरुआत के पहले 3 दिन दिल्ली में यात्रियों को आवश्यक जानकारी और प्रशिक्षण दिया जाता है। इस यात्रा पर जाने के लिए 18 साल से अधिक और 70 साल से कम उम्र के व्यक्ति को ही अनुमति दी जाती है। वहीं दूसरा रास्ता सिक्किम के नाथूला से होकर जाता है। इस रास्ते पर मोटरवाहन चल सकते हैं, इसीलिए बुजुर्ग यात्री इस रास्ते से जाना पसंद करते हैं। इस रास्ते से यात्रा का खर्च 2 लाख रुपये आता है। इस बार इस रास्ते से मानसरोवर यात्रियों के 10 बैच जाएंगे, जिसमें हर बैच में 50 यात्री होंगे। विदेश मंत्रालय प्रत्येक वर्ष जून से सितंबर के दौरान दो अलग-अलग मार्गों- लिपुलेख दर्रा (उत्तराखण्ड), और नाथु-ला दर्रा (सिक्किम) से कैलाश यात्रा का आयोजन करता है।

कैलाश मानसरोवर की यात्रा(केएमवाई) अपने धार्मिक मूल्यों और सांस्कृतिक महत्व के कारण जानी जाती है। हर साल सैकड़ों यात्री इस तीर्थ यात्रा पर जाते हैं। भगवान शिव के निवास के रूप में हिन्दुओं के लिए महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ यह जैन और बौद्ध धर्म के लोगों के लिए भी धार्मिक महत्व रखता है। यह यात्रा उन पात्र भारतीय नागरिकों के लिए खुली है, जो वैध भारतीय पासपोर्टधारक हों और धार्मिक प्रयोजन से कैलाश मानसरोवर जाना चाहते हैं। विदेश मंत्रालय यात्रियों को किसी भी प्रकार की आर्थिक इमदाद अथवा वित्तीय सहायता प्रदान नहीं करता।

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