बुंदेलखंड में गरीबी और बेरोजगारी आतंकवाद से भी ज्यादा खतरनाक : उमा भारती

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फाइल फोटो

झांसी, 09 जून । केन्द्रीय पेयजल और स्वच्छता मंत्री उमा भारती ने कहा कि बुंदेलखंड में भुखमरी, गरीबी, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी आतंकवाद और नक्सलवाद से ज्यादा खतरनाक है। हम आतंकवाद से तो लड़ सकते हैं, लेकिन बुंदेलखंड में गरीबी और अमीरी की भयावह खाई को केवल यहां रोजगार पैदा करके ही दूर किया जा सकता है। इसके लिए हम सभी को पूरे जोश के साथ आगे आना होगा।

पैरा मेडिकल काॅलेज के सभागार में बुंदेलखंड इंवेस्टर्स समिति के कार्यक्रम में उद्घाटन सत्र का शुभारंभ करते हुए बतौर मुख्य अतिथि उमा भारती ने कहा कि बुंदेलखंड में एक ओर हमारा अतीत शौर्य की गाथाओं से भरा है। तो दूसरी ओर वर्तमान में गांवों में गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी जैसी विसंगतियां हैं। पृथक बुन्देलखण्ड राज्य निर्माण पर बोली केन्द्रीय मंत्री बुन्देलखण्ड को लेकर आज तक गंभीर विचार सामने नहीं आ रहा। हमारी पार्टी पृथक बुन्देलखण्ड का असितत्व मानती है। मप्र के हिस्से का दुराग्रह होने के चलते यह पृथक नहीं हो पा रहा। तीन माह से ज्यादा समय नहीं लगेगा पृथक राज्य निर्माण में। लेकिन जब तक यह नहीं होता बुन्देलखण्ड विकास निगम इसके विकास की जिम्मेदारी निभाएगा। जातिवादी सोच विकासवादी सोच को निगल गई केन्द्री मंत्री ने उत्तर प्रदेश की समस्याओं में बुन्देलखण्ड को सबसे ज्यादा कष्ट उठाने वाला बताया। उन्होंने कहा कि बुन्देलखण्ड पहले से ही परेशानियों से जूझ रहा था। क्षमता कम होने के चलते और कमजोर होता गया। विकासवादी सोच गायब हो गई। जातिवादी सोच ने ब्यूरोक्रेसी की सोच को प्रभावित किया। अधिकारी कुछ लोगों को खुश करने में लग गए। जिन व्यापारियों की इच्छा रोजगार देने की थी। उन्हें चक्कर कटवाए गए।

यहां की संपत्तियों पर अवैध तरीके से कब्जा कर लिया गया। बड़ा दुष्चक्र रचा गया और अवैध रुप से गलत लोगों को एसेट्स दे दिए गए। जब व्यापारियों को और अधिकारियों को समय पर सब कुछ मिलेगा तो बुन्देलखण्ड भारत में व्यापार और रोजगार में नंबर एक पर होगा। बुन्देलखण्ड में पानी की नहीं कनैक्टिविटी की कमी उमा भारती ने कहा कि नीति आयोग की ओर से पीने के पानी की व्यवस्था के लिए योजना तैयार करेंगे। बुन्देलखण्ड में पानी की कमी नहीं है। कनैक्टिविटी की कमी है। उस कनैक्टिविटी को जरा ऊपर से देखना होगा। गंगा सफाई का ढीकरा अधिकारियों के सिर फोड़ा गंगा स्वच्छता अभियान पर उमा भारती ने कहा कि अधिकारियों के कारण उन्होंने गंगा सफाई अभियान को छोड़ दिया। बताया कि अधिकारियों को समझाते-समझाते मेरी हालत बिगड़ गई थी। बाल झड़ गए थे।

पूरे शरीर में फोड़े पड़ गए थे। पांचों राज्यों के अधिकारियों को पूरी रात समझाती थी और सुबह हालत जहां की तहां होती थी। इसीलिए पीएम मोदी से कहा कि मुझमें इन अधिकारियों को समझाने की हिम्मत नहीं है, और गंगा अभियान को छोड़ दिया। हमें विश्वास रखते हुए करना होगा काम उन्होंने इन्नोवेटिव टीम का उत्साह वर्धन करते हुए कहा कि नकारात्मकता निकालकर सकारात्मकता के साथ कार्य करना होगा। हम ये न सोचें कि हमें अधिकारी सहयोग करेंगे या नहीं, हमें कई बार चक्कर काटने पड़ेंगे। बल्कि हमें यह सोचना पड़ेगा कि हमें नियमों का पालन करते हुए कार्य करना है।

हम समाज के लिए कार्य करने के लिए कर्म करें। हमें कर्म के भाव को समझना होगा। अपने क्षेत्र का कर्ज चुकाने को भूख हड़ताल पर बैठने को तैयार उमा ने का कि ललितपुर झांसी संसदीय क्षेत्र के कर्ज को चुकाने के लिए मैं भूख हड़ताल पर बैठने को भी तैयार हूं। मेरे अंदर एक विश्राम भाव है। एक बड़े आदमी ने कहा कि आपको चुनाव तो लड़ना नहीं है। मैं अब अपने और सरकार के द्वारा किए गए वायदों को अक्टूबर तक पूर्ण करने के लिए लगन से प्रस्तुत हूं। हजारों साल तक ऐसा मौका नहीं मिलेगा जब दिल्ली में बैठा एकमात्र प्रधानमंत्री उत्तर प्रदेश के सबसे पिछड़े क्षेत्र को विकसित बनाने का सपना देख रहा है।

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