मुख्यमंत्री ने गोंडा और फतेहपुर के जिला​धिकारी को किया निलंबित

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लखनऊ, 07 जून। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भ्रष्टाचार और सरकारी खाद्यान्न वितरण में अनियमितताएं की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए बड़ी कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री ने गोंडा और फतेहपुर के जिलाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

डीएम फतेहपुर कुमार प्रशांत और डीएम गोंडा जितेंद्र बहादुर सिंह के ऊपर अनियमितता बरतने, अवैध खनन समेत कई मामलों में भ्रष्टाचार की शिकायत मिल रही थी। सरकारी प्रवक्ता के अनुसार जनपद गोंडा में सरकारी खाद्यान्न वितरण में अनियमितताएं पाये जाने तथा वरिष्ठ स्तर पर अप्रभावी तथा अत्यधिक शिथिल नियंत्रण को गम्भीरता से लेते हुए जिलाधिकारी गोंडा जे.बी सिंह, प्रभारी जिलापूर्ति अधिकारी राजीव कुमार तथा जिला खाद्य विपणन अधिकारी अजय विक्रम सिंह को तत्काल प्रभाव से निलम्बित करने और सम्पूर्ण मामले में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने के निर्देश दिये हैं। सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि 31 मई, 2018 को विशेष सचिव खाद्य, अपर आयुक्त खाद्य द्वारा गेहूं क्रय केन्द्रों पर जांच की गई थी। जांच में पाया गया कि 13 मई के बाद से लेकर अब तक लगभग 18 दिनों में कोई भी खरीद न किये जाने का कोई औचित्य नहीं दर्शाया गया है साथ ही किसानों को टोकन वितरण न करने व गेहूं खरीद को प्रभावित करने में खाद्य आयुक्त द्वारा 06 जून, 2018 को प्रकरण में दोषी पाये अधिकारी व कर्मचारी के विरूद्ध कार्यवाही की गई है।

क्रय केन्द्र प्रभारी बिसौली मण्डी श्री नरेन्द्र कुुमार को निलम्बित कर फतेहपुर के जिला प्रबन्धक पी.सी.एफ. मोहम्मद रफीक अंसारी को भी निलम्बित किया। इसी प्रकार फतेहपुर मंण्डी के यू.पी. एग्रो. संस्था के क्रय प्रभारी प्रेम नारायण को भी निलम्बित किया गया। जिला प्रबन्धक यू.पी. एग्रो गुलाब सिंह को निलम्बित करने की संस्तुति की गई है। विपणन शाखा के क्रय केन्द्रों में दोषी पाये गये विपणन निरीक्षक शक्ति जायसवाल को निलम्बित किया गया। जिला खाद्य विपणन अधिकारी घनश्याम के खिलाफ निलम्बन की कार्यवाही की गई है।

साथ ही सम्पूर्ण प्रकरण में एफ.आई.आर. भी दर्ज करने का निर्देश दिया गया है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री कह चुके हैं कि किसी भी कीमत पर भ्रष्टाचार और अनियमितत बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आज की कार्रवाई इसी कड़ी में की गई है। मुख्यमंत्री अधिकारियों की शिकायतों को सुनने और अवैध खनन पर लगाम लगाने के निर्देश पहले भी कई बार दे चुके हैं। इसके बाद भी शिकायतें लगातार आ रही थी।

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