मन की बात: पीएम मोदी ने दिया पर्यावरण को बचाने का संदेश

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नई दिल्ली, 27 मई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में इस बार गर्मी, विश्व पर्यावरण सहित तमाम मुद्दों पर बात की। 5 जून को मनाए जाने वाले विश्व पर्यावरण दिवस के संदर्भ में प्रधानमंत्री ने बात करते हुए प्लॉस्टिक प्रदूषण को रोकने का आह्वान किया। अपने रेडियो कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि आने वाले 5 जून को हमारा देश भारत आधिकारिक तौर पर विश्व पर्यावरण दिवस समारोह की मेजबानी करेगा। यह भारत के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण उपलब्धि है

और यह जलवायु परिवर्तन को कम करने की दिशा में विश्व में भारत के बढ़ते नेतृत्व को भी स्वीकृति मिल रही है – इसका परिचायक है। इस बार की थीम है ‘बीट प्लास्टिक पॉल्यूशन’। मेरी आप सभी से अपील है, इस थीम के भाव को, इसके महत्व को समझते हुए हम सब यह सुनिश्चित करें कि हम पॉलीथिन, लो-ग्रेड प्लॉस्टिक का उपयोग न करें। प्लॉस्टिक पॉल्यूशन का जो एक नकारात्मक प्रभाव हमारी प्रकृति पर, वाइल्ड लाइफ पर और हमारे स्वास्थ्य पर पड़ रहा है, उसे कम करने का प्रयास करें। पीएम मोदी ने कहा कि अब जरूरत है कि हम पर्यावरण संरक्षण के उपायों को देखें, जानें और उन्हें अपने रोजमर्रा के जीवन में उतारने का प्रयास करें। जब भयंकर गर्मी होती है, बाढ़ होती है। बारिश थमती नहीं है। असहनीय ठंड पड़ जाती है तो हर कोई विशेषज्ञ बनकर ग्लोबल वॉर्मिंग, क्लाइमेंट चेंज की बातें करता है लेकिन क्या बातें करने से बात बनती है? प्रकृति के प्रति संवेदनशील होना, प्रकृति की रक्षा करना, यह हमारा सहज स्वभाव होना चाहिए, हमारे संस्कारों में होना चाहिए।
पिछले कुछ हफ़्तों में हम सभी ने देखा कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों में धूल-आँधी चली, तेज़ हवाओं के साथ-साथ भारी वर्षा भी हुई, जो कि असामान्य है। जान-हानि भी हुई, माल-हानि भी हुई। यह सारी चीज़ें मूलतः मौसम में जो बदलाव है, उसी का परिणाम है। हमारी संस्कृति, हमारी परंपरा ने हमें प्रकृति के साथ संघर्ष करना नहीं सिखाया है। हमें प्रकृति के साथ सद्भाव से रहना है, प्रकृति के साथ जुड़ करके रहना है। महात्मा गाँधी ने तो जीवन भर हर कदम इस बात की वकालत की थी। जब आज भारत क्लाइमेट जस्टिस की बात करता है।
जब भारत ने कॉप-21 और पेरिस समझौते में प्रमुख भूमिका निभाई। जब हमनें अंतरराष्ट्रीय सोलर एलायंस के माध्यम से पूरी दुनिया को एकजुट किया तो इन सबके मूल में महात्मा गाँधी के उस सपने को पूरा करने का एक भाव था। इस पर्यावरण दिवस पर हम सब इस बारे में सोचें कि हम अपने ग्रह को स्वच्छ और हरित बनाने के लिए क्या कर सकते हैं? किस तरह इस दिशा में आगे बढ़ सकते हैं? क्या नया कर सकते हैं? बारिश का मौसम आने वाला है, हम इस बार रिकार्ड स्तर पर वृक्षारोपण का लक्ष्य ले सकते हैं और केवल वृक्ष लगाना ही नहीं बल्कि उसके बड़े होने तक उसके रख-रखाव की व्यवस्था करना

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