पेट्रोल की बढ़ती कीमतः सरकार लगा सकती है तेल उत्पादक कंपनियों पर टैक्स

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नई दिल्ली, 25 मई । पेट्रोल-डीजल की आसमान छूती कीमत को लेकर आलोचना की मार झेल रही मोदी सरकार अब आम लोगों को राहत देने के लिए ओएनजीसी जैसी तेल उत्पादक कंपनियों पर टैक्स लगाने की सोच रही है। विशेषज्ञ कह रहे हैं कि सरकार के इस कदम से पेट्रोल-डीजल के दाम दो रुपये तक कम हो सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद सरकार की तरफ से कहा गया कि वह इसके स्थायी समाधान करने का सोच रही है।

हालांकि जानकार सूत्रों ने बताया है कि भारतीय तेल उत्पादक कंपनियों के लिए कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरेल तक सीमित की जा सकती है। सूत्रों के अनुसार अगर यह योजना अमल में लाई जाती है तो भारतीय ऑयल फील्ड से तेल निकाल कर उसे अंतरराष्ट्रीय दरों पर बेचने वाली तेल उत्पादक कंपनियां अगर 70 डॉलर प्रति बैरेल की दर से ज्यादा पर पेट्रोल बेचती हैं, तो उन्हें आमदनी का कुछ हिस्सा सरकार को देना होगा। साथ ही सरकार ग्राहकों को राहत देने के लिए आबकारी कर में भी थोड़ी कटौती कर सकती है। राज्यों से भी वैट और सेल्स टैक्स कम करने को कहा जा सकता है। इसलिए पेट्रोल की बढ़ते मूल्य से परेशान लोगों को इन कदमों से तत्काल थोड़ी सी राहत मिलने की उम्मीद है। सूत्रों ने बताया कि सरकार इस मामले में आगे किसी आलोचना से बचने के लिए सरकारी और निजी दोनों तरह की पेट्रोल उत्पादक कंपनियों पर सेस लगाने की सोच रही है।

उल्लेखनीय है कि दुनिया के कुछ विकसित देशों में तेल उत्पादक कंपनियों पर इस तरह के टैक्स लगाए जाते रहे हैं। ब्रिटेन ने 2011 में उत्तरी सागर से निकलने वाले पेट्रोल और गैस पर इसी तरह का टैक्स लगाते हुए 75 डॉलर प्रति बैलर का रेट तय किया था। वर्ष 2008 में जब तेल की कीमत में उछाल आई थी तो अपने देश में भी ऐसे टैक्स का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन केयर्न इंडिया जैसी प्राइवेट कंपनियों की तरफ से भारी विरोध के कारण इसे तब ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था।

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