आईआईटी और हृदय रोग संस्थान ने तैयार की डेंगू वायरस की नई पहचान किट

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कानपुर, 18 मई । डेंगू वायरस से लड़ना जल्द इसकी पहचान कर निदान कर पाना विकास शील देशों के लिए गंभीर चिन्ता का विषय है। ऐसे में रोजाना बढ़ रहे डेंगू के मामलों के बीच एक राहत भरी खबर है और आईआईटी और हृदय रोग संस्थान ने एक ऐसी किट तैयार की है जो तीन दिन के अंदर वाले संक्रमित मरीज के शुरुआती लक्षणों को आसानी से बता देगी। यह किट क्लीनिकल ट्रायल के बाद जल्द ही बाजार में उतार दी जाएगी।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर और लक्ष्मीपति सिंहानिया हृदय रोग संस्थान कानपुर ने संयुक्त रूप से डेंगू के शुरूआती लक्षणों को पता लगाने के लिए एक किट को तैयार किया है। हृदय रोग संस्थान के निदेशक डा. विनय कृष्णा और आईआईटी के प्रोफेसर शान्तनु भट्टाचार्य ने शुक्रवार को प्रेस वार्ता कर बताया कि अब डेंगू के मरीजों का इलाज कर रहे डाक्टर पांच से छह दिन तक अंधेरे में नहीं रख पाएंगे।

इसके लिए दोनों संस्थानों ने कई महीनों के शोध के बाद नयी रापिड पेपर माइक्रो फ्लोडिक शॉलूसन किट विकसित की है। यह किट तीन दिनों के अन्दर मानव सीरम वायरस की बेहद कम एकाग्रता पर डेंगू के शुरुआती लक्षणों का पता लगायेगी। डा. कृष्णा ने बताया कि सौ रुपये की लागत से मिलने वाली इस किट को क्लीनिकल ट्रायल के बाद तीन-चार माह बाद बाजारों में उतारा जायेगा।

कहा कि इससे लिए गए नमूने में डेंगू के वायरस आसानी से पकड़ में आ जाएंगे। यह जांच अब तक की सबसे सटीक और संवेदनशील जांच है। प्रो. भट्टाचार्य ने बताया कि अब तक डेंगू का पता लगाने के लिए आम तौर पर एलिजा जांच का ही सहारा लिया जाता रहा है। लेकिन इस जांच के जरिए शुरुआती पांच से छह दिन तक इसके संक्रमण का पता नहीं लग पाता। था। ऐसे में यह नई किट के जरिये डेंगू के सभी चारों सीरोटाइप का सटीक पता बहुत जल्दी लग जाएगा। कहा कि डेंगू बुखार का पहला वर्णन 1779 में लिखा गया था। 20वीं शताब्दी की शुरुआत में वैज्ञानिकों ने यह जाना कि बीमारी डेंगू वायरस के कारण होती है तथा यह मच्छरों के माध्यम से संचरित होती है।

डेंगू के लक्षण
हृदय रोग संस्थान के निदेशक डा. विनय कृष्णा ने बताया कि डेंगू बुखार एक संक्रमण है जो डेंगू वायरस के कारण होता है। डेंगू का इलाज समय पर करना बहुत जरुरी होता हैं। मच्छर डेंगू वायरस को संचरित करते हैं। डेंगू बुख़ार को हड्डीतोड़ बुखार के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इससे पीड़ित लोगों को इतना अधिक दर्द हो सकता है कि जैसे उनकी हड्डियां टूट गयी हों। डेंगू बुखार के कुछ लक्षणों में बुखार, सिरदर्द, त्वचा पर चेचक जैसे लाल चकत्ते तथा मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द शामिल हैं।

कुछ लोगों में, डेंगू बुखार एक या दो ऐसे रूपों में हो सकता है जो जीवन के लिये खतरा हो सकते हैं। पहला, डेंगू रक्तस्रावी बुखार है, जिसके कारण रक्त वाहिकाओं में रक्तस्राव या रिसाव होता है तथा रक्त प्लेटलेट्स का स्तर कम होता है। दूसरा डेंगू शॉक सिंड्रोम है, जिससे खतरनाक रूप से निम्न रक्तचाप होता है। ऐसे में दोनों संस्थानों द्वारा तैयार की नई किट बहुत कारगर साबित होगी।

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