वाराणसी फ्लाईओवर हादसा: सीएम योगी घायलों से मिल पूछा हाल, परिजनों के चित्कार से गमगीन रहा माहौल

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वाराणसी,16 मई (हि.स.)। धर्म नगरी वाराणसी में बीते मंगलवार की शाम कैंट स्टेशन के निकट हुए निर्माणाधीन फ्लाईओवर हादसे से पूरा शहर गमजदा और आक्रोशित है। दिल दहला देने वाले खूनी हादसे के दूसरे दिन बुधवार को घटना स्थल पर लोगों की भीड़ जुटी रही। भारी पिलर के नीचे दबे वाहनों को क्रेन की मदद से एनडीआरएफ और पुलिस पीएसी के जवान निकलवाने में जुटे रहे। इस दौरान बीमें के नीचे दबी रोडवेज की बस निकाली गयी तो उसका हाल देख लोग सिहर गये। पिचक कर लगभग डिब्बे में बदल चुकी बस को देख राहगीर घटना की भयावहता से दहल गये।

अलसुबह से ही जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में घटना को लेकर लोग चर्चा कर अफसरों की लापरवाही और निर्माण कार्य में हुए घपले को लेकर गुस्से में दिखे। हादसे में बिहार छपरा के पिता पुत्र सहित कुल 18 लोगों की मौत हुई है। इन ​मृतकों की हुई शिनाख्त मृतकों में खुशिहाल राम, संजय पुत्र खुशिहाल, शिवबचन पुत्र खुशहाल ग्राम सहेड़ी जिला-गाजीपुर, राम मिलन चौहान पुत्र हरिनाथ जनपद मऊ, भवानी एनडीआरएफ, रामचन्द्र पुत्र विद्यादेवी-ग्राम सहेड़ी जिला-गाजीपुर, विद्यादेवी पत्नी अज्ञात-ग्राम बन्दनपुर थान-खुटहन, जिला-जौनपुर, अरुण वर्मा पुत्र अज्ञात-ग्राम बन्दनपुर थान-खुटहन, जिला-जौनपुर, रघुनाथ की अभी तक पुष्टि हो पायी है। शेष मृतकों की शिनाख्त करने में पुलिस प्रशासन जुटा हुआ है। छपरा के राम बहादुर सिंह वाराणसी में सिंडिकेट बैंक में कार्यरत थे।

बेटे कुमार वैभव और पत्नि को कोटा राजस्थान छोड़ने के लिए कार से कैंट स्टेशन जा रहे थे। कुमार वैभव कोटा में अपनी मां के साथ रहकर इंजीनियरिंग की तैयारी कर रहा था। हादसे में पूरी कार फ्लाईओवर के बीम के नीचे आ गई। हादसे में रामबहादुर सिंह और उनके बेटे की घटना स्थल पर ही मौत हो गई। जबकि पत्नि जीवन मृत्यु के बीच झूल रही है। बेटी पल्लवी और अन्य परिजन अस्पताल में बिलख रहे थे। रिश्तेदार और शुभचिंतक भी उन्हें ढ़ाढ़स बढ़ाने के साथ सुबकते रहे। अस्पताल में मृतक रामबहादुर के साले राजेश सिंह रंजन भांजी और बहन की देखभाल में जुटे रहे। घटना के लिए प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया। जबकि अन्य परिजन पिता पुत्र के शव का पोस्टमार्टम होने के इंतजार में रोते रहे। इसी तरह गाजीपुर के सहेड़ी गांव के खुशहाल राम अपने बेटे संजय के इलाज के लिए बोलेरो गाड़ी से वाराणसी आए थे। साथ में दुसरे बेटे शिवबचन राम, ड्राइवर वीरेंद्र भी था।

संजय का इलाज लहरतारा कैंसर अस्पताल में चल रहा था। हादसे में खुशहाल राम और उनके दोनो बेटों संजय और शिवबचन की मौत हो गई। हृदय विदारक मौत से पूरा परिवार सदमे में है। इसी तरह बस्ती जिले से अश्विनी नई कार खरीदने अपने पिता,बहनोई और भाई के साथ आये थे। हादसे में अश्वनी के पिता की मौत हो गई। जबकि भाई और दोस्त जख्मी हो गये। अश्वनी बिलख—बिलख कर रो रहे थे। हाइसे में ही बस में सवार एनडीआरएफ के जवान बृजेश,उनके दो साथी मऊ निवासी राममिलन सिंह और अलीगढ़ निवासी भवानी सिंह के साथ वाराणसी आ रहे थे। हादसे में बृजेश के दोनों साथियों की मौत हो गयी। जबकि बृजेश जख्मी होकर ट्रामा सेन्टर में भरती हैं।हादसे की जानकारी मिलते ही उनके परिजन भोर में बीएचयू ट्रामा सेन्टर पहुंच गये। मुख्यमंत्री भी देर रात अस्पताल पहुंचे हृदय विदारक ​हादसे की जानकारी पाते ही मंगलवार की देर रात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शहर पहुंच गये। घटना स्थल का जायजा लेने के बाद मुख्यमंत्री घायलों से मिले और उनका ढ़ाढ़स बढ़ाया। सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत में कहा कि इस हादसे की हकीकत जानने के लिए तीन सदस्यीय तकनीकी टीम का गठन किया गया हैं।

टीम की रिपोर्ट के बाद जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी। यह घटना बहुत दु:खद है। हादसे के बाद ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मुझसे जानकारी ली और इसके बाद मैंने उप मुख्यमंत्री केशव मौर्य को यहां भेज दिया था। हमारी प्राथमिकता घायलों को बेहतर इलाज देने की है। दो दिन पहले ही पुल पर रखा गया था बीम सिगरा थाना क्षेत्र के शहर के सबसे व्यस्त इलाकाें में शुमार लहरतारा में मंगलवार सायं को हादसा हुआ। जहां दो दिन पहले ही पुल पर रखे गए स्लैब को जोड़ने का काम चल रहा था। इसके बावजूद नीचे से ट्रैफिक गुजरता रहा। प्रशासन ने ट्रैफिक नहीं रोका। यह लापरवाही आम लोगों पर भारी पड़ी। हताहतों की संख्या 35 प्रत्यक्षदशियों की मानें तो हताहतों की संख्या 35 है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। तीन लोगों को मलबे से जिंदा निकाला गया है। हादसे के आधे घंटे बाद पहुंची मदद एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि हादसे के करीब आधे घंटे बाद राहत-बचाव दल पहुंचा। हादसे के बाद मौके पर आला अफसर मौके पर पहुंचे। पुलिस के साथ एनडीआरएफ की टीम ने राहत कार्य शुरू किया। उसके बाद ही गिरे हुए पिलर को क्रेन की मदद से हटाने का काम शुरू हुआ।

चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर सहित चार सस्पेंड मंगलवार देर रात वाराणसी पहुंचे उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद ने फ्लाईओवर के चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर एचसी तिवारी, मैनेजर केआर सूदन, असिस्टेंट इंजीनियर राजेश और अपर इंजीनियर लालचंद को निलंबित किए जाने की जानकारी दी। राज्य सेतु निगम पर घटिया सामग्री लगाने का आरोप सामने आ रहा है। 48 घंटे में जांच करने के निर्देश मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने घटना की जांच के लिए 3 सदस्यीय समिति का गठन किया और 48 घंटे में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। समिति के अध्यक्ष राज प्रताप सिंह (कृषि उत्पादन आयुक्त, यूपी) होंगे।। समिति के अन्य सदस्य भूपेंद्र शर्मा (प्रमुख अभियंता और विभागाध्यक्ष सिंचाई विभाग) और राजेश मित्तल (प्रबंधक निदेश जल निगम) हैं। अक्टूबर, 2015 से शुरू हुआ था पुल निर्माण का काम वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है और सिगरा थाना क्षेत्र के लहरतारा इलाके में इस फ्लाईओवर के निर्माण के लिए 2 मार्च, 2015 को 12973.80 लाख रुपये की राशि मंजूर की गई थी। अक्टूबर 2015 में पुल बनना शुरू हुआ। पुल का निर्माण पूरा करने की सीमा अक्टूबर 2018 तय थी, लेकिन अब तक 47 फीसदी काम ही पूरा हो पाया है। पुल को बनाने का काम उत्तर प्रदेश सेतु निर्माण निगम द्वारा किया जा रहा है। हादसे के पीछे ये उठ रहे सवाल हादसे के लगभग आधा घंटे बाद पुलिस पहुंची और तकरीबन डेढ़ घंटे बाद राहत और बचाव कार्य शुरू हुआ। पहले पुल का काम अक्टूबर 2018 में पूरा होना था, लेकिन देरी के कारण इसकी अवधि बढ़ाई गई थी।

2019 में होने वाले आम चुनाव से पहले एक किमी लंबे इस फ्लाईओवर का निर्माण पूरा करने था। निर्माण के दौरान ट्रैफिक नहीं रोका गया। रात की बजाए दिन में काम हो रहा था, दिन में काम होने के बावजुद भी कोई भी सुरक्षा के इंतजाम नहीं थे। घटनास्थल से 600 मीटर की दूरी पर वाराणसी रोडवेज का बस स्टैंड है। इसके बावजूद बड़ी गाड़ियां की एंट्री बैन नहीं थी। विपक्ष ने साधा निशाना पूर्व मुख्यमंत्री और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए कहा है कि देश के सबसे अधिक ध्यान दिए जाने वाले लोकसभा क्षेत्र में विकास की हकीकत यह है। मंत्री इस क्षेत्र में आकर नियमित निरीक्षण करते हैं। क्या यह घटना हादसा है या भ्रष्टाचार की देन है। राज्य सरकार को वाराणसी की जनता काे इसका जवाब देना चाहिए।” साथ ही उन्होंने सपा कार्यकर्ताओं से राहत-बचाव में प्रशासन की मदद की अपील की और घटना की ईमानदारी से जांच की मांग की।

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