कानपुर में गंगा नदी हुई जहरीली, घाटों पर मरी मिली लाखों मछलियां

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कानपुर, 15 मई । गंगा नदी का पानी केमिकल युक्त होने से जहरीला हो गया, जिससे जलीय जीव जन्तुओं में संकट पैदा हो गया है। ऐसे में कन्नौज के बाद कानपुर के घाटों में भी लाखों मछलियां मरी हुई मिली। मछलियों की मरने की जानकारी पर जिला प्रशासन व प्रदूषण विभाग की टीम मौके पर जाकर जांच की और लोगों को मरी मछलियां खाने से मना कर दिया। क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी ने बताया कि पानी की जांच के लिए सैंपल ले लिया गया है और रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। फिलहाल लोगों को ऐसी जगहों से दूर रहने की सलाह दी गई है।

कन्नौज में दो दिन पहले गंगा नदी के किनारे मरी हुई मछलियां मिली। जिसके बाद हरकत में आया प्रशासन ने तत्काल निरीक्षण किया था। अभी वहां पर मछलियों के मरने का कारण नहीं पता चल सका कि मंगलवार को कानपुर में भी गंगा के घाटों पर लाखों मछलियां मरी हुई मिल गई। मछलियों की मरने की खबर पर बिल्हौर उप जिलाधिकारी विनीत कुमार व एडीएम सिटी सतीश पाल ने बिल्हौर के नानामऊ घाट, चौबेपुर के बंदिमाता घाट से लेकर बिठूर तक का जायजा लिये।

इस दौरान क्षेत्रीय प्रदूषण विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहें। एडीएम सिटी ने बताया कि प्रथम दृष्टतया जांच में पता चला है कि कन्नौज की गंगा में गर्रा नदी से जहरीला पानी आया है। जिसकी वजह से कानपुर में भी मछलियों की मौत हुई है। तो वहीं यह भी आशंका जताई जा रही है कि गंगा नदी के किनारे खरबूज, तरबूज की फसल में कीटनाशक का प्रयोग करने की वजह से भी गंगा किनारे मछलियां मर सकती है।

क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी कुलदीप मिश्रा ने बताया कि गंगा के पानी का सैंपल लिया जा चुका है। पानी में आक्सीजन की कमी की संभावना है और इसी के चलते मछलियों के मौत का कारण हो सकता है। कहा कि, आक्सीजन की कमी से जलीय जीव जन्तुओं का खतरा बढ़ गया है, हालांकि अभी इस तरह का केमिकल युक्त पानी कानपुर जनपद तक ही सीमित है। लेकिन अगर यही पानी कानपुर के आगे जाकर भी प्रभाव छोड़ने में कामयाब रहा तो ड्योढ़ी घाट के आगे पायी जाने वाली डाल्फिन को भी खतरा हो सकता है।

ऐसा ही कुछ हाल पाण्डु नदी का है जो शहर के दक्षिण क्षेत्र से होकर गंगा मिलती है।
यहां पर भी काफी मात्रा में बैटरी से निकलने वाले हानिकारक रसायन बह रहें है। जिसके चलते यहां भी जलीय जंतुओं की स्थिति ठीक नहीं है। तो वहीं मरी हुई मछलियों को देख निवाला बनाने के लिए चील-कौओं का भी हुजूम देखा गया। एडीएम सिटी ने बताया कि जांच की गई है और कोशिश की जा रही है कि डाल्फिन के क्षेत्र में यह पानी न पहुंच पाये। इसके लिए संबंधित विभागों से बैठकर जल्द ही केमिकलयुक्त पानी के प्रभाव को खत्म किया जाएगा।

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