मुंबई: विज्ञापन पर सरकार ने खर्च किए 4343 करोड़ रुपए

0
75

मुंबई, 14 मई । प्रधानमंत्री बनते ही नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली मोदी सरकार ने गत 46 महीने में सभी प्रकार के विज्ञापनबाजी पर 4343.26 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। यह जानकारी आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली को केंद्र सरकार के ब्यूरो ऑफ आऊटरिच एंड कम्युनिकेशन विभाग ने दी हैं।

विज्ञापनबाजी पर होनेवाले पैसों की बर्बादी पर चारों ओर से आलोचना होने के बाद इस वर्ष 25 प्रतिशत की कटौती कर मोदी सरकार ने 308 करोड़ रुपए गत वर्ष की तुलना में कम खर्च किया हैं।आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने प्रधानमंत्री कार्यालय से केंद्र सरकार का गठन होने से लेकर आज तक विभिन्न विज्ञापनों पर हुए खर्च की जानकारी मांगी थी। केंद्र सरकार के ब्यूरो ऑफ आऊटरिच एंड कम्युनिकेशन विभाग के वित्तीय सलाहकार तपन सुत्रधर ने अनिल गलगली को 1 जून 2014 से दिए गए विज्ञापन की जानकारी मुहैया कराई। इसमें 1 जून 2014 से 31 मार्च 2015 इस दौरान रु 424.85 करोड़ रुपए प्रिंट मीडिया, 448.97 करोड़ रुपए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और 79.72 करोड़ रुपएबाह्य प्रचार पर खर्च किया हैं। वर्ष 2015-2016 इस आर्थिक वर्ष में 510.69 करोड़ रुपए प्रिंट मीडिया, 541.99 करोड़ रुपए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और 118.43 करोड़ रुपए बाह्य प्रचार पर खर्च किया हैं। वर्ष 2016-2017 आर्थिक वर्ष में 463.38 करोड़ रुपएप्रिंट मीडिया, 613.78 करोड़ रुपए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और 185.99 करोड़ रुपए बाह्य प्रचार पर खर्च किया हैं। 1 अप्रैल 2017 से 7 दिसंबर 2018 इस दौरान 333.23 करोड़ रुपएप्रिंट मीडिया पर खर्च किया गया। 1 अप्रैल 2017 से 31 मार्च 2018 इस दौरान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर 475.13 करोड़ रुपए खर्च किया हैं और बाह्य प्रचार में 147.10 करोड़ रुपए खर्च किया गया। यह 1 अप्रैल 2017 से 31 जनवरी 2018 तक खर्च किया गया हैं। विपक्ष औऱ सोशल मीडिया पर जनता का पैसा विज्ञापनबाजी पर कैसे बर्बाद होता है, इस पर बड़े पैमाने पर आलोचना होने के बाद शायद मोदी सरकार की ओर से वर्ष 2017-18 आर्थिक वर्ष में खर्च में कटौती करने की बात सामने आई हैं। वर्ष 2016-17 आर्थिक वर्ष में कुल 1263.15 करोड़ रुपए खर्च करनेवाली सरकार ने वर्ष 2017-2018 आर्थिक वर्ष में 955.46 करोड़ रुपएखर्च किया हैं। इस बार 308 करोड़ रुपए कम खर्च करते हुए करीब 25 प्रतिशत की कटौती की गई हैं। अनिल गलगली के अनुसार जरुरी विज्ञापन करना अपेक्षित है। लेकिन कभी-कभी अनावश्यक विज्ञापनबाजी कर जनता के पैसे की बर्बादी की जाती हैं। इसलिए सभी प्रकार के ख़र्च की जानकारी वेबसाइट पर ऑनलाइन करनी चाहिए।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here