हमीरपुर में 2083 कुओं का खत्म हो रहा अस्तित्व

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-उपेक्षा से 1469 कुओं का पानी भी प्रदूषित
हमीरपुर, 08 मई । उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में इन दिनों सूरज की तपिश से हजारों कुयें सूख गये हैं। कुदरत की काली छाया पड़ने से जहां पानी के स्रोत एक-एक कर जवाब दे रहे हैं वहीं पानी की समस्या से निजात दिलाने वाला सरकारी तन्त्र भी धनाभाव के कारण प्यासे लोगों की कोई मदद करने के लिए आगे नहीं बढ़ रहा है। मजे की बात तो यह है कि बुन्देलखण्ड विशेष पैकेज का करोड़ों रुपया भी पानी के स्रोतों को संवारने में मिट्टी में दफन कर दिया गया बावजूद स्थिति आज भी जस की तस बनी हुई है।

हमीरपुर जनपद में 3552 कुयें हैं जिसमें अकेले सुमेरपुर ब्लाक क्षेत्र में 286 कुयें हैं जबकि कुरारा में 484, मौदहा में 746, मुस्करा में 751, गोहाण्ड में 369 तथा सरीला क्षेत्र में 346 कुयें हैं। जिले में 2083 कुयें तो ऐसे हैं जिनका कोई भी उपयोग नहीं हो रहा है क्योंकि देखरेख के अभाव में यह कुयें बदहाल हो चुके है। वैसे देखा जाये तो इन कुओं में मात्र 278 कुयें मरम्मत कराये जा सकते हैं, लेकिन विकास विभाग के आला अधिकारी इन कुओं को लेकर चुप्पी साधे हैं। बताया जाता है कि सुमेरपुर ब्लाक में जहा 167 कुयें बदहाली के भंवर में अपना अस्तित्व खो रहे हैं वहीं कुरारा में 142, सुमेरपुर में 167, मौदहा में 226, मुस्करा में 598, राठ में 417, गोहाण्ड में 341 व सरीला क्षेत्र में 192 कुओं का अस्तित्व खत्म होने के मुहाने है।

सरकारी आंकड़ों में नजर डालें तो इस जिले में 1469 कुयें ऐसे है जिनका पानी पीने योग्य है और यह कुयें ग्रामीण उपयोग में ला रहे है। ब्लाक वार तस्वीर देखी जाये तो सुमेरपुर क्षेत्र में 119, कुरारा में 342, मुस्करा में 153, राठ में 153, गोहाण्ड में 28 तथा सरीला में 152 कुयें इन दिनों उपयोग में लाये जा रहे है। मगर इन कुओं में भी कुदरत की काली छाया पडऩे से 60 फीसदी कुयें तो पूरी तरह से डेड लाइन में आ चुके है। विकास विभाग के अधिकारियों की लापरवाही भी देखिये कि जिले में 278 कुओं की मरम्मत भी नहीं करायी जा रही है जबकि थोड़ी रकम खर्च कर दी जाये तो यह कुयें गर्मी के मौसम में ग्रामीणों प्यास बुझा सकते हैं। सुमेरपुर क्षेत्र में 18 कुयें मरम्मत की बाट जोह रहे हैं, जबकि कुरारा में 56, मौदहा में 44, मुस्करा में 46, राठ में 49, गोहाण्ड में 3 व सरीला क्षेत्र में 12 कुयें मरम्मत के लिये सूची में दर्ज है।

जानकारों की मानें तो कुरारा ब्लाक के कई ऐसे प्राचीन कुयें हैं जो गंदगी व कूड़ा-करकट से पाट दिये गये हैं। हमीरपुर नगर के पतालेश्वर मन्दिर, सहित कई इलाकों में ऐतिहासिक कुओं का अब नामोनिशान मिट गया है। जो कुयें मौजूदा में ठण्डा पीने भी दे रहे हैं उनमें गर्मी के मौसम को देखते हुये दवा भी नहीं डाली गयी है जिसके कारण कुओं का पानी प्रदूषित होना बताया जा रहा है।

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