पिता के आंगन से नहीं उठी बेटी की डोली….

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छतरपुर, 07 मई। एक पिता का सबसे बड़ा सपना होता है कि अपनी बेटी के हाथ पीले कर आंगन से उसकी डोली उठाए और एक पुत्री भी बेहद गौरव महसूस करती है उस क्षण को जब उसका बाबुल अपने आंगन से बेटी को विदा करे, परंतु बुन्देलखण्ड में यह सब मिथ्या बातें हैं। यहां सामंतियों का साया है और सरकारी तंत्र गिरवी रखा है।

खजुराहो थाना क्षेत्र के ग्राम नयागांव निवासी रमेश रैकवार लहुलुहान मां और भाई के साथ पुलिस कप्तान के समक्ष सुरक्षा की गुहार लगा रहा था कि सामंती तत्वों ने बेटी की शादी न करने देने की धमकी दी है। पुलिस ने पीडि़त परिवार की नहीं सुनी। अंतत: मजबूर पिता को अनजान स्थान पर ले जाकर पुत्री का विवाह करना पड़ा। रैकवार मांझी समाज ने प्रजातंत्र में दबंगों के आगे बेवश सरकार की निंदा की है।

रैकवार मांझी समाज की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि 30 अप्रैल की रात्रि रमेश की पुत्री का लगुन कार्यक्रम था। गांव के दबंग रविंद्र सिंह, राहुल सिंह, छोटू राजा एवं शिवम सिंह शराब के लिए पैसे की मंाग करने लगे। मना करने पर मारपीट कर दी, इतने से जी नहीं माना तो रमेश को मारने की नियत से गोली मार दी जो पार्वती के सीने में जा लगी। घटना की दास्तान पीडि़त परिवार ने पुलिस कप्तान को सुनाई और सुरक्षा की मांग की ताकि 5 मई को उसकी पुत्री का विवाह ठीक से हो सके। पुलिस द्वारा सुरक्षा की बात तो दूर ऊपर से पीडि़तों पर भी अपराध 307 दर्ज कर लिया है ताकि मामला एक तरफा न रह सके। समाज की प्रेस विज्ञप्ति में भाजपा सरकार पर आक्रोश जताया है एक तरफ तो महिलाओं और गरीबों के साथ होना का ढोंग करती है दूसरी तरफ दबंगों के आगे घुटने टेक देती है। 


दबंगों के आतंक से जब एक संभ्रांत परिवार अपनी पुत्री का विवाह नहीं कर सकता है तो फिर आम जीवन में वह कैसे गुजर-बसर चलाता होगा यह जांच का विषय है। सरकारी तंत्र के रवैये की निंदा समाज द्वारा की गय है। सुंदर रैकवार, दिलीप रेकवार, मोतीलाल, आनंद, कृष्णकांत, कैलाश, रामस्वरूप, रमेश, अशोक आदि ने आरोपियों पर कार्यवाही करने की मांग की है।

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