कानपुर :-सरकार अपने वादों को कर्तव्य समझ कर करे पूरा : किरीट भाई महाराज

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कानपुर, 06 मई । प्रसिद्ध कथा वाचक किरीट भाई महाराज 26 साल बाद  कानपुर आये और रविवार को मीडिया से मुखातिब होते धर्म, राजनीति और कूटनीति पर खुलकर बोले। कहा कि सरकार ने वादे तो बहुत किये पर परिणाम सबके सामने है। ऐसे में सरकार को कर्तव्य समझ कर जनता से किये गये वादों को पूरा करना चाहिये। 

कानपुर में कथा करने आए किरीट भाई महाराज ने रविवार को फजलगंज के एक होटल में मीडिया से बातचीत की। आसाराम के जेल जाने के सवाल पर कहा कि देश में करोड़ों संत है अगर किसी एक ने गलत कर दिया तो सभी को उसी नजर से देखना गलत है। हर किसी को एक ही तराजू में नहीं तौला जा सकता है। उन्होंने कहा कि साधु व संत का राजनीति में आना खतरे से खाली नहीं है। कहा कि समाज में तीन प्रकार की नीति है राजनीति, धर्मनीति और कूटनीति और सभी का महत्वपूर्ण स्थान है। धर्म में कूटनीति का मिश्रण नहीं होना चाहिए और धर्म का काम मार्गदर्शन करना है। लेकिन अब देखा जा रहा है कि धार्मिक लोग भी राजनीति में हस्तक्षेप कर रहें हैं जो गलत है। कहा कि राजनीति में सम्पूर्ण सत्य नहीं बोला जा सकता और यह धर्मनीति के लिए वर्जित है। इसलिए साधु व सन्यासी को इससे दूर रहना चाहिये। कहा, संन्यासी को अगर वेशभूषा के साथ झूठ बोलना पड़े तो यह धर्म के लिए ठीक नहीं है। तो वहीं ऐसे संतों पर भी कटाक्ष किया जो इसको व्यवसाय बना रखें हुए हैं, कहा, व्यावसाय को सोचकर संत बनना की इच्छा हो तो न बने इससे विनाश ही होगा। वर्तमान राजनीति और सरकार के सवाल पर कहा कि इन दिनों राजनीति का स्तर गिरता जा रहा है और चर्चा में आने के लिए नेता यह भूल जाते हैं कि इसका समाज में क्या असर पड़ेगा। सरकार के विकास कार्यों को लेकर कहा कि उन्हें अपने किए वादों को निभाने की कोशिश करनी चाहिए। सरकार ने वादें तो बहुत किए है लेकिन पूरा कितना हुआ है यह सबके सामने है। सरकार यानी राजा का कर्तव्य है कि जनता को सुख दें, रोजगार दे, तभी देश उन्नति कर सकेगा। वर्तमान में युवा पीढ़ी में हो रहे बदलाव पर कहा कि उनके भटकने के पीछे समाजिक दबाव है। खुद को अपडेट रखने के लिए युवा पीढ़ी द्वारा कुछ ऐसे काम किए जा रहे हैं जो उन्हें नहीं करने चाहिए। इसके लिए राजनीति से लेकर समाज को भी आगे आना चाहिये। 

हालांकि यह समय का चक्र है घूमता रहता है एक दिन युवा पीढ़ी अपने आप धर्म के रास्तें वापस आ जाएगी। शहर के विकास को लेकर कहा कि आज से 26 साल पहले यानी 1992 में कानपुर आया था और आज दूसरी बार आया हॅूं, लेकिन हालात जस के तस दिख रहें हैं। सड़कों पर उसी तरह धूल उड़ रही है और विकास के नाम पर खानापूर्ति हो रही है। जिसको लेकर समाज को सक्रिय होना चाहिये। कहा कि जब तक समाज अपनी भूमिका सही से अदा नहीं करेगा तब तक किसी भी दशा में बदलाव होने की कल्पना नहीं की जा सकती है और इसमें युवाओं की भूमिका अहम होनी चाहिये।

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