कानपुर : उत्तर पुस्तिकाओं की जांच कर उप मुख्यमंत्री करें कार्रवाई: डा. अंगद सिंह

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कानपुर, 01 मई । यूपी बोर्ड परीक्षा का परिणाम आ गया और छात्र व छात्राएं अगली कक्षा के लिए उत्साहित हैं। तो वहीं शहर के प्रतिष्ठित कॉलेज बीएनएसडी शिक्षा निकेतन के प्रधानाचार्य ने परीक्षा में पूरी तरह से पारदर्शिता न होने का आरोप लगाकर उप मुख्यमंत्री को पत्र लिख टॉपर छात्राओं की उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच कराए जाने की बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि अभी शासन मात्र 40 फीसदी ही नकल माफियाओं पर नकेल कस पाया है।



प्रदेश में सरकार बदलने के बाद योगी सरकार ने यूपी बोर्ड परीक्षा को नकल विहीन कराने का संकल्प लिया और पूरी परीक्षा सीसीटीवी की निगरानी में हुई, जिसको लेकर यह माना जा रहा था कि इस बार परीक्षा परिणाम काफी कमजोर आएगा। लेकिन परीक्षा परिणाम में कुछ खास अंतर नहीं आया। इसके चलते अच्छे विद्यालयों के प्रधानाचार्य संतुष्ट नहीं है। इसी के चलते मंगलवार को शहर के प्रतिष्ठित कॉलेज बीएनएसडी शिक्षा निकेतन के प्रधानाचार्य डा. अंगद सिंह ने प्रेस वार्ता कर नकल विहीन परीक्षा के दावे को खारिज कर दिया। कहा कि शासन ने जो नीति बनाई थी उस पर पूरी तरह से अमल नहीं किया जा सका, जिसके चलते नकल माफिया इस बार की भी परीक्षा में सक्रिय रहें। खासतौर पर स्वकेन्द्र परीक्षा में तो और अधिक। इसी के चलते कुछ जनपदों के विद्यालयों की छात्राओं का परीक्षा परिणाम बेहतर रहा और उत्तर प्रदेश की टॉपर्स सूची में जगह बनाने में सफल रहीं।


आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसे तमाम विद्यालय हैं जहां पर प्रदेश में स्थान लाने के लिए छात्राओं की अलग से विशेषज्ञों द्वारा कॉपी लिखी जाती हैं। उन्होंने बताया कि उप मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री डा. दिनेश शर्मा को खत लिखा गया है और मांग की गई है कि सभी टॉपर्स छात्राओं की उत्तपुस्तिओं की दोबारा जांच कराई जाये और उनकी लेखनी से मिलान कराया जाय। जिससे नकल माफियाओं का पूरा खेल सामने आ जाएगा और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होना चाहिये।



कई राज्यों के छात्र देते हैं परीक्षा
प्रधानाचार्य ने बताया कि उत्तर प्रदेश में नकल माफियाओं का संजाल इतना अधिक फैला है कि कई राज्यों के छात्र यहां पर परीक्षा देने आते हैं। यहां पर अच्छे अंक लाकर अपने यहां नौकरी करने लगते हैं। इस विषय पर भी सरकार को सोचना होगा और नकल माफियाओं को रोकने के लिए और कड़े कदम उठाने होगें। हालांकि इस बात की स्वतंत्रता है कि कोई भी छात्र किसी भी राज्य से पढ़ाई कर सकता है, पर सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश में दूसरे राज्यों के छात्र परीक्षा देने आते हैं जिससे नकल माफियाओं की सक्रियता को किसी भी सूरत पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।


जेईई का परिणाम यूपी बोर्ड के लिए निराशाजनक
प्रधानाचार्य डा. अंगद सिंह ने बताया कि जेईई मेन्स का सोमवार को परिणाम आया, जिसमें यूपी बोर्ड के छात्रों का परिणाम निराशाजनक रहा। आरोप लगाया कि देश की इस महत्वपूर्ण परीक्षा में ऐसे प्रश्न तैयार किये जाते हैं जो यूपी बोर्ड के अलावा अन्य बोर्डों के अनुरूप रहता है, जिससे यूपी बोर्ड का छात्र कड़ी मेहनत के बाद भी असफल हो जाता है। उदाहरण के तौर पर बताया कि इस बार ज्यादातर दक्षिण भारत के छात्र सफल रहें। बताया कि दो साल पहले तो चेन्नई शहर से 40 फीसदी छात्र सफल हुए थे। ऐसे में इन विसंगतियों को दूर करने के लिए केन्द्र सरकार को एक कमेटी गठन कर समानता की नीति पर परीक्षा का आयोजन कराना चाहिये।

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