दुआ करे, सातवें चरण में चुनावी हिंसा ना हो, अब तक हुआ तो हुआ….!

0
54

महाभारत के सात कोठों की तरह भारत के महाभारत का चुनाव भी सात चरणों में हो रहा है। अब तक छह चरण पूरे हो गये है। सातवा और आखरी मंझिल की तरह एक चरण का चुनाव बाकी है। जिस में 60 सीटों के लिये चुनाव होने है। जो छह चरण का चुनाव संपन्न हुवा है उस में ज्यादातर प. बंगाल से हिंसा की घटनायें घटने की खबरे आइ है। भाजपा और टीएमसी दलो के कार्यकर्ताओं की हत्यायें हुइ है। पोलिंग बुथ में गोलिया चली है तो चुनाव में खडे प्रत्याशी पर भी हमले हुये है। अन्य राज्यो में भी चुनावी हिंसा की छिटपूट घटनायें हुइ है लेकिन कार्यकर्ता की हत्या जैसी हिंसा नहीं हुइ ये एक अच्छी बात है। क्योंकि आम तौर पर देखा गया है की चुनाव में युपी और बिहार में ज्यादा हिंसा की वारदातें होती आइ है लेकिन इसबार ये स्थान प. बंगाल ने ले लिया है। छत्तीसगढ में भी चौथे चरण में भाजपा के विधायक की हत्या नक्सलीयों ने की थी। नक्सलीयों ने चुनाव को प्रभावित करने का प्रयास किया लेकिन वे इस बार इतने सफल नहीं हो पाये। लेकिन प. बंगाल इस बार चुनावी हिंसा में सब से उपर रहा है। क्या ये कोइ गर्व की बात है क्या..?

पहले एक ही चरण में चुनाव संपन्न होते थे। बैलेट पेपर के जरिये चुनाव होते थे। अब इवीएम के जमाने में एक चरण की बजाय सात-सात चरणों में चुनाव हो रहे है। ऐसा नहीं की मेन पावर कम है लेकिन नेतागण ज्यादा से ज्यादा घूम घूम कर प्रचार कर सके इसलिये चुनाव सात-सात चरणो में कराने की एक नई परंपरा सरकार में और चुनाव आयोग में प्रस्थापित हो गइ है। चलो मान लिया की नेतागण ज्यादा पर्चार कर सके इसलिये चुनाव का दायरा बढा दिया जाता है लेकिन जिस दिन चुनाव हो, जिस राज्य में चुनाव हो वहां नेतागण अपने सीने पर और माइक के नीचे चुनाव का सिम्बोल लगा कर रैलियां संबोधित कर तो क्या ये आचार संहिता का उल्लंघन नहीं है..? ये सवाल यदि चुनाव आयोग से पूछा जाय तो तुरन्त जवाब मिलेंगा इस में कोइ उल्लंघन नहीं है ये फरियाद खारिज की जाती है…! चुनाव आयोग ने इस बार तो ऐसी कइ फरियादो में फटाफट क्लीन चीट दी है। शहिदो के नाम वोट मांगने के खिलाफ की गई फरियाद में भी कई दिनो तक “गहरा अध्ययन” करने के बाद कहा- इसमें कोइ आचारसंहिता का उल्लंघन नही…! चूंकि ये फरियाद पीएम के खिलाफ थी इसलिये…?!

सातवें और आखरी चरण का मतदान 19 मई को होने जा रहा है। ये चरण में चुनावी हिंसा की एक भी वारदात न हो क्या ऐसा नहीं हो सकता…? सभी आधार राजनितिक दलों पर है। विशेष कर प. बंगाल की सीएम ममता बनर्जी अपने राज्य में सातवें चरण में कानून-व्यवस्था को ऐसा बनाये रखे की एक भी हिंसा की घटना न हो। सुबह से लेकर साम तक शांतपूर्ण वातावरण में चुनाव संपन्न हो. कीसी की जान न जाये। कीसी प्रत्याशी पर हमला न हो और मतदाता निर्भय होकर मतदान कर शके ऐसा माहौल बनाने की प्रथम जिम्मेवारी चुनाव आयोग की है। छह चरण में चे चुनाव आयोग प.बंगाळ में हिंसा को नहीं रोक पाया लेकिन सातवें चरण में तो ज्यादा सुरक्षा बल भेज कर बिना कीसी हिंसा के चुनाव संपन्न हो क्या ये आम मतदाता का सपना पूरा होगा…? ये नामुमकिन नहीं हैजी। जी है तो जहान है। आज जब बादलों के पीछे विमान को रडार से छिपाकर बालाकोट पर हवाइ हमले हो सकते है तो क्या बंगाल में हिंसा को नहीं रोका जा सकता …? चुनाव आयोग जी सोचो… आज इ-मेइल का जमाना है, जो पहले 1988 में होता था…. तो नेता की तरह आगे की सोच रख हिंसा को रोके और जो हिंसा करे उसे ठोके..!

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here