मैच फिकसिंग के बाद अब बेंच फिक्सिंग भी…ये क्या हो रहा है…?

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भारत में क्रिकेट के मैदान में आइपीएल मेच चल रहे है। आइपीएल और अन्य मेचो में अकसर मैच फिक्सिंग के आरोप लगे। कुछ खिलाडी को सजा भी हुइ। जिसमें क अझहर भी है। कीसी श्रीकांत पर भी आरोप लगे थे। मैच फिक्सिंग के बाद अब भारत में न्यायतंत्र में भी मैच फिकसिंग की तरह बेंच फिक्सिंग के भी आरोप लगे और इन दिनो देश की सब से अदालत के चीफ जस्टीस पर यौन शोषण के आरोप लगते ही एक बडी साजिश का भी पर्दाफास सामने आया। खुद जस्टीस अरूण मिश्राने भरी अदालत में देश के सामने एसी बाते रखी की यदि उसे रोका नहीं गया तो न्यायतंत्र भी तूट जायेगा। लोकतंत्र में एक न्यायतंत्र और प्रेस मिडिया ही है जिस पर आम लोगो का विश्वास बना है। जस्टीस मिश्राने कहा की न्यायतंत्र को अपने इशारों पर नहीं अपनी उंगलियों पर नचानेवालो सुन लो, आग से मत खेलो। हर दिन हम सुनते आये है की बेंच फिक्सिंग होती है। हम अमीर और ताक्तवर लोगों को हताना चाहते है कि सुप्रिम कोर्ट से खेलना आग से खेलना समान है। न्यायिक प्रणालि में कोइ भी मैंच फिक्सिंग नहीं हो सक्ती।
असल में चीफ जस्टीस सन्मानिय रंजन गोगोइ पर एक महिला कर्मी द्वारा यौल शोषण के आरोप लगते ही न्यायतंत्र में भूचाल सा आया गया। सी.जे.ने काफी धैर्य से काम लेते हुये अपने उपर लगे आरोप की जांच के लिये तीन जजों की कमेटि बनाइ और टे एक बहोत ही बडी साचिश होने के सबूत बाहर आते ही उसकी अलग से जांच के लिये अवकाशप्राप्त जस्टीस पटनायक को जिम्मेवारी सौंपी गइ। तरह की जांच चल रही है। एक विभागीय और एक साजिश की। देश के जागरूक नागरिक और पूरा न्यायतंत्र इस बात का इन्तेजार कर रहा है की आखिर वे कौन सी ताक्ते है जो सुप्रिम कोर्ट को अपने इशारों पर चलाना चाहते है। इसलिये अदालत भी जांच कमेटि के रिपोर्ट सार्वजनिक करे। सुरक्षा या देश की सलामती या कीसी और कारणवश ये रिपोर्ट जाहिर नहीं हो सकती ऐसा कोइ कारण दे कर उसे फाइलों में ही न रखे। क्योंकि ये कोइ छोटीमुटी बात नहीं। जिस महिलानें अपने यौन शोषण के आरोप सीजे पर लगाये वह अच्छी तरह जानती ही है की उसने किस पर आरोप लगाया। यह मामला कोइ आम नहीं। वह अदालत में ही काम करती थी और सीजे के घर भी काम करती थी। वही न्यायतंत्र की प्रणालि से वाकिफ है। और इस महिलाने हलफनामा कर अपने यौन शोषण की जानकारी 22 जजों को भेजे थी। लेकिन जब न्याय नहीं मिला तब वह मिडिया के पास पहुंची और तब जा कर पूरा मामला सामे आया।
इस मामले में बंद लिफाफेवाली बात न हो ये भी जरूरी है। क्यों कि होता है यह की सीलबंद कवर में दी गइ जानकारी या रिपोर्ट फिर सार्वजनिक नहीं होती। क्या देश को ये जानने का अधिकार नहीं की CJI पर आरोप क्यों लगे..? जैसा की जस्टीस मिश्राजीने फरमाया की ये एक बहोत बडी साजिश-लार्जर कोन्सपरन्सी- है। और उस के पीछे अमीर तथा ताक्तवर लोग है, तो आखिर वह अमीर कौन है…? कौन है वे जो भारत में सब से बडी अदालत को अपने इशारों पर चलाना चाहते है…? भारत की 135 करोड की आबादी को ये पता चलना ही चाहिये। ताकि समाज में घूमनेवाले वे भेडिये कौन है और अदालत उसे खिलाफ कडी सी कडी सजा क्या देती है…! न्यायतंत्र देश को सब से बडा मेसेज दे की ये भारत है भारत…उसके न्यायतंत्र को अमीर से अमीर खरीद नहीं सकता…!

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