अकबरपुर लोकसभा में कमल-हाथ में टक्कर, हाथी पिछडा

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अकबरपुर लोकसभा में कमल-हाथ में टक्कर, हाथी पिछडा
-कछुआ गति से कहीं निकल न जाएं जदयू का तीर
चुनावी डेस्क, कानपुर- चुनावी तिथि पास आते ही अकबरपुर लोकसभा के समीकरण तेजी से बदलने लगे है। वर्तमान में जो स्थितियां व वोटरों का रूझान देखकर काफी कुछ चुनाव कमल व हाथ के बीच होने का एहसास कराने लगा है। भाजपा प्रत्याशी देवेन्द्र सिंह भोले व कांग्रेस के राजाराम पाल दोनों ही रातदिन एक करके वोटरों को अपने पक्ष में वोट देने के लिए रिझाने में लगे है। हालांकि भाजपा का चुनाव पूरा मोदी पर ही केेन्द्रित है। वहीं, कांग्रेस का चुनाव प्रियंका गांधी के सक्रिय होने से करवट लेने लगा है। हालांकि शुरूआती दौर में गठबंधन के प्रत्याशी निशा सचान का चुनाव तेजी से उठा था, लेकिन प्रसपा प्रत्याशी महेन्द्र ंिसंह यादव के ताल ठोकते ही हाथी-साइकिल की गति धीमी हो गयी। हालांकि भाजपा प्रत्याशी देवेन्द्र सिंह भोले के प्रति स्थानीय वोटरों में काफी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि सांसद जी जीतने के बाद क्षेत्र के विकास कार्य में सक्रिय नहीं हुए। वे पूरे पांच साल तक जाति विशेष के लिए ही सक्रिय रहे। वोटरों का एक बडा वर्ग नाराजगी के बावजूद मोदी के नाम पर मतदान करने को तैयार हो रहा है। हालांकि कांग्रेस के राजाराम पाल वोटरों की इस नाराजगी को पूरी तरह से कैश करने में लगे है। पाल पिछले पांच सालों में क्षेत्र की जनता के बीच सक्रिय रहे है। जिसका लाभ उनको मिलने की संभवना है। वहीं, जदयू यानी नीतीश कुमार की पार्टी से भाग्य अजमा रहे रवि सचान क्षेत्र की जनता के बीच दूध में शक्कर की तरह घुल मिल गये है। साफ सुथरी छवि रखने वाले रवि भी अपनी कडी मेहनत के कारण वोटरों के दिल में जगह बनाने में सफल हो रहे है। जनता के बीच बिहार की छवि दर्शा कर वोट देने का आग्रह कर रहे है। कुछआ की गति से पूरी लोकसभा में घूम-घूमकर वे भी कमल-हाथ व हाथी को पिछाडने में तेजी से सक्रिय है।

 

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