नेताओं की संपत्ति में बेतहाशा वृद्धि: केंद्र का SC में जवाब- व्यवस्था करने में लगेगा वक्त

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नई दिल्ली : नेताओ की संपत्ति में तेजी से हो रहे इजाफे को लेकर आज केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में जवाब दिया। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी है कि अभी इसकी पुख्ता और स्थायी व्यवस्था करने में कुछ वक्त लगेगा।

लिहाजा अभी पता नहीं वल पाएगा कि लोकसभा चुनाव 2019 में मैदान में उतरे प्रत्याशियों की संपत्ति में इतनी तेजी से वृद्धि कैसे हुई। अवमानना नोटिस के जवाब में दिए हलफनामे में केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए काफी लोगों से विचार विमर्श करने की जरूरत है, जिसमें काफी वक्त लग रहा है। एनजीओ लोक प्रहरी की अवमानना याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 12 मार्च को विधि मंत्रालय में विधायी विभाग के सचिव जी। नारायण राजू को नोटिस जारी किया था।
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने पूछा कि फरवरी, 2018 को दिए कोर्ट के आदेश के मुताबिक कानून मंत्रालय नेताओं की संपत्ति में बेतहाशा वृद्धि की वजह जानने वाली प्रणली क्यों तैयार नहीं कर पाया।

इस पर राजू ने कहा कि कोर्ट के आदेश के आधार पर राज्यसभा के महासचिव की अध्यक्षता में नवंबर, 2018 में एक बैठक की गई थी। इसमें राज्यों और कई विभागों के प्रतिनिधियों ने शिरकत की थी। इसमें दो अलग तरह के विचार सामने आए।

पहला, राज्य सरकारों के विधायी विभागों के तहत एक संस्था बनाई जाए। दूसरा, एकदम अलग ज्यादा स्वतंत्र और निष्पक्ष व्यवस्था की जाए। राजू ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने राज्यसभा महासचिव को बंटी हुई राय के कारण फिर बैठक करने के लिए लिखा।

इस पर राज्यसभ महासचिव ने जवाब दिया कि अब आगे का फैसला कानून मंत्रालय को करना है। सरकार ने कोर्ट के आदेश के मुताबिक व्यवस्था करने के लिए और वक्त की मांग की है। राजू के हलफनामे के मुताबिक, स्थायी व्यवस्था करने के लिए अभी काफी लोगों से बातचीत करनी होगी। सरकार इस पर काम शुरू कर चुकी है। लिहाजा कोर्ट कुछ और वक्त दे।

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