कानपुर की तीनों लोकसभा सीटों पर मजबूत हुई भाजपा

0
589

कानपुर, 10 अप्रैल । गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में भाजपा को मिली करारी हार के बाद पूरे प्रदेश सहित कानपुर की राजनीति में हलचल मच गई। तो वहीं दूसरी ओर सपा और बसपा के गठबंधन को देखते हुए भाजपा के नेताओं में चिंता की लकीरे दिखने लगी। लेकिन कानपुर की तीनों लोकसभा सीटों के क्षेत्र से जनता में अच्छी पकड़ रखने वाले करीब एक दर्जन विपक्षी नेताओं के भगवाधारी होने से एक बार फिर सियासी समीकरण बदलते दिख रहें हैं। या यूं कहें कि इन तीनों सीटों पर भाजपा मजबूत स्थिति में खड़ी दिखाई दे रही है।

कानपुर नगर जनपद में तीन लोकसभा सीटें हैं। जिनमें कानपुर नगर का संसदीय क्षेत्र पूरी तरह से कानपुर जनपद के अर्न्तगत आता है। दूसरी सीट अकबरपुर है जिसका करीब आधा क्षेत्र यहां से जुडा हुआ है। इसी तरह मिश्रिख सीट है जिसके अर्न्तगत कानपुर नगर की बिल्हौर विधानसभा सीट आती है। इन तीनों सीटों में पिछले लोकसभा चुनाव से पहले दो पर कांग्रेस व एक सीट पर बसपा का कब्जा था। लेकिन मोदी लहर के सामने तीनों सीटों पर भाजपा के प्रत्याशियों ने विपक्षी प्रत्याशियों को लाखों मतों से पराजित किया था।

लेकिन हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या की खाली हुई संसदीय सीट (क्रमशः गोरखपुर और फूलपुर) पर बहुजन समाज पार्टी के समर्थन से समाजवादी पार्टी ने भारी जीत दर्ज कर ली। इसके साथ ही बसपा मुखिया मायावती ने राज्यसभा चुनाव में पार्टी प्रत्याशी के हार के बाद आगामी लोकसभा चुनाव में गठबंधन की घोषणा कर दी। जिससे प्रदेश की राजनीतिक गलियारों में बदल रहे सियासी घटनाक्रमों की हलचल होने लगी। इससे कानपुर भी अछूता नहीं रहा और भाजपा संगठन इसे दुरूस्त करने के लिए कमर कस ली और तीनों लोकसभा सीटों में जनता में अच्छी पकड़ रखने वाले 10 बड़े नेताओं को अपने पाले में कर लिया। जिसमें ज्यादातर बसपा के नेता हैं। ऐसे में यह माना जा रहा है कि प्रदेश स्तर पर भले ही सपा और बसपा का गठंबधन हो गया हो पर कानपुर में भाजपा को टक्कर दे पाना टेढ़ी खीर साबित होगी।

हालांकि राजनीति में कुछ भी स्थाई नहीं होता और लोकतांत्रिक चुनाव में सब कुछ जनता के हाथ पर होता है। लेकिन जिस प्रकार से जनता में अच्छी पकड़ रखने वाले नेताओं ने भाजपा का दामन थामा है उससे एक बात तो साफ है कि गठबंधन को जीत आसान नहीं होगी। भारतीय जनता पार्टी के क्षेत्रीय अध्यक्ष मानवेन्द्र सिंह ने कहा कि इन नेताओं के आने से तीनों सीटों पर पार्टी की स्थित और मजबूत हो गई है। हालांकि केन्द्र और प्रदेश सरकार की नीतियों व जन कल्याणकारी योजनाओं से जनता पूरी तरह से पार्टी के प्रति निष्ठा जता रही है। जिससे यह तय है कि आगामी लोकसभा चुनाव में एक बार फिर इन तीनों सीटों में ही नहीं बल्कि प्रदेश की सभी सीटों पर पार्टी की जीत होगी।

यह हुए भगवाधारी
भारतीय जनता पार्टी की नीतियों से प्रभावित होकर तीनों लोकसभा सीटों से 10 नेताओं ने प्रदेश अध्यक्ष डा. महेन्द्र नाथ पाण्डेय के सामने भगवाधारी चोला ओढ़ लिया। जिनमें अकबरपुर सीट के अन्तर्गत आने वाले सिकंदरा सीट से बसपा से पूर्व व रनर प्रत्याशी महेन्द्र कटियार, भोगनीपुर सीट से लगातार दो बार बसपा से रनर प्रत्याशी रहे धर्मपाल सिंह भदौरिया, अकबरपुर रनिया सीट से रनर बसपा प्रत्याशी डा. सतीश शुक्ला, बसपा से जीती अकबरपुर नगर पालिका अध्यक्ष ज्योत्सना कटियार, पूर्व विधायक गंगासागर संखवार की पुत्री व रसूलाबाद सीट से बसपा से रनर प्रत्याशी रहीं पूनम संखवार, घाटमपुर से निर्दलीय दो बार से लगातार नगर पालिका अध्यक्ष संजय सचान, शिवली नगर पंचायत अध्यक्ष अवधेश कुमार शुक्ला हैं।

इसी तरह मिश्रिख लोकसभा सीट के अर्न्तगत आने वाले बिल्हौर नगर पालिका अध्यक्ष शादाब खान और शिवराजपुर नगर पंचायत अध्यक्ष विनोद तिवारी भाजपा में शामिल हुए। जिन्होंने निर्दलीय चुनाव जीता था। इसके साथ ही पिछले लोकसभा चुनाव में मिश्रिख सीट से बसपा से चुनाव लड़े और दो बार सांसद रहे अशोक रावत व इसी सीट से सपा से चुनाव लड़े तीन बार के सांसद जयप्रकाश रावत ने भाजपा की सदस्यता ली। इसके अलावा तीनों लोकसभा सीटों में जनता में अच्छी पकड़ रखने वाले एक दर्जन अन्य नेताओं ने भी भगवा चोला ओढ़ लिया।

उप चुनाव में लिखी गई थी स्क्रिप्ट
भाजपा विधायक मथुरा प्रसाद पाल के निधन से खाली हुई सिंकदरा सीट के उप चुनाव में पार्टी ने मथुरा प्रसाद के छोटे बेटे अजीत पाल को मैदान में उतारा। तो वहीं सपा ने पूर्व सांसद राकेश सचान की पत्नी व कानपुर नगर की पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष को मैदान में उतार दिया। बसपा ने उप चुनाव से दूरी बना ली जिससे कुर्मी बाहुल्य इस सीट पर भाजपा के लिए चुनौती बन गई। इसी के चलते मतदान से दो सप्ताह पहले संगठन ने बसपा के तीन संगठन के नेताओं को भाजपा में शामिल करा लिया। इसके साथ ही संगठन ने अंदरखाने इसी सीट से रनर प्रत्याशी रहे महेन्द्र कटियार के साथ जनपद की चारों सीटों के बसपा के पूर्व प्रत्याशियों को अपने पाले में कर लिया।

जिसके चलते इन सभी ने अपने मतदातओं का वोट भाजपा के पक्ष में करने के लिए जी जान लगा दी और कड़ी टक्कर के बावजूद भाजपा की जीत हो सकी। तभी से यह कयास लगाया जा रहा था कि जल्द ही यह सभी लोग भाजपा का दामन थाम लेगें।

टिकट कटने के लगने लगे कयास
कानपुर की तीनों लोकसभा सीटों से जनता में अच्छी पकड़ रखने वाले दर्जनों विपक्षी पार्टियों के नेताओं के भाजपा में शामिल होने से पार्टी में तो खुशी की लहर दौड़ पड़ी। लेकिन अब यह भी कयास लगने लगे कि तीनों लोकसभा सीट के वर्तमान सांसदों का टिकट कट सकता है। चर्चा यह है कि कानपुर नगर से वरिष्ठ नेता व पार्टी के पूर्व अध्यक्ष डा. मुरली मनोहर जोशी का अधिक उम्र होने के चलते और पार्टी की नीतियों के अनुरूप जनता से नजदीकी न बनाकर चलने के चलते अकबरपुर सांसद देवेन्द्र सिंह भोले और मिश्रिख सांसद अंजू बाला का टिकट कट जाएगा। इन संभावनाओं को लेकर भाजपा के करीब एक दर्जन नेता अपनी दावेदारी के लिए भागदौड़ शुरू कर दी है। हालांकि पार्टी के नेता इस पर कुछ बोलने से मना कर रहें हैं लेकिन दबी जुबान यह जरूर कह रहें हैं कि आगामी लोकसभा चुनाव में कुछ बदलाव जरूर दिखेगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here