पीएनबी घोटाला : सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से जांच का ब्यौरा मांगा

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कोर्ट ने केंद्र सरकार को 23 अप्रैल तक जांच रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है; कोर्ट की निगरानी में जांच से सहमत नहीं सरकार

नई दिल्ली, 09 अप्रैल। पंजाब नेशनल बैंक के घोटाले की जांच की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जांच का ब्यौरा मांगा है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को 23 अप्रैल तक जांच रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। आज सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने फिर कोर्ट की निगरानी में जांच का विरोध किया है।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा कि इस मामले की जांच में पांच एजेंसियां लगी हुई हैं। 251 छापे मारे गए हैं और पांच हजार करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है। इसलिए इस मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की जरुरत नहीं है। केंद्र सरकार ने इस याचिका को खारिज करने की मांग की।

पिछली सुनवाई के दौरान भी केंद्र सरकार ने इस याचिका का विरोध किया था। अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा था कि मामले की जांच चल रही है| इसलिए इसकी समानांतर जांच की जरुरत नहीं है। उन्होंने कहा था कि ये ठीक नहीं है कि कोई याचिका दायर कर ये मांग करे कि जांच का स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया जाए। उनकी इस दलील का वकील और याचिकाकर्ता विनीत ढांडा ने विरोध किया था और कहा था कि हमने अपनी याचिका में कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग नहीं की है। लगता है कि अटार्नी जनरल ने याचिका को पढ़ा ही नहीं है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर सुनवाई ये कहते हुए टाल दी थी कि अटार्नी जनरल से कोई ये नहीं पूछ सकता है कि उन्होंने याचिका पढ़ा है कि नहीं। अदालत ने कहा कि आप केवल कानून की बात कीजिए।

पिछले 21 फरवरी को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता और वकील विनीत ढांडा ने अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल द्वारा याचिका का विरोध किए जाने पर सवाल उठाया था। तब जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने टोकते हुए कहा कि आप जिस तरह की दलीलें पेश कर रहे हैं वो पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन न होकर पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटिगेशन की तरह लगता है।

विनीत ढांडा द्वारा दायर जनहित याचिका में घोटाले की निष्पक्ष जांच के साथ नीरव मोदी को प्रत्यर्पण कर जल्द वापस लाने की मांग की गई है। एक और याचिका वैभव खुरानिया ने दायर की है। खुरानिया नीरव मोदी के गीतांजलि जेम्स में निवेशक भी हैं।

खुरानिया की याचिका में कहा गया है कि कंपनी ने खुरानिया के साथ 80 लाख रुपये की धोखाधड़ी की है। खुरानिया के मुताबिक उन्होंने मेहुल चोकसी से मुलाकात करके गीतांजलि जेम्स में निवेश किया था और स्टोर खोला था। कुछ ही महीनों में पता चला कि कंपनी की हालत खस्ता है और उनका स्टोर तीन-चार महीनों में ही बंद हो गया। याचिका में कहा गया है कि खुरानिया ने पुलिस से इसकी शिकायत की लेकिन पुलिस ने कोई शिकायत दर्ज नहीं की। इसे लेकर जब ने हाईकोर्ट गए तब पुलिस ने एफआईआर दर्ज की।

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