कानपुर : बंजारे की आत्मा आज भी बुलाती है लेकर नाम

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वर्ल्ड खबर एक्सप्रेस न्यूज

कानपुर : क्या 21 वीं सदी में भी प्रेत आत्माएं होती है क्या दादी नानी के किस्से कहानियों से बाहर की दुनियां में भी बुरी आत्माएं इंसानों को तंग करती है हो न हो लेकिन इस गॉव के ग्रामीणों का यही मानना है कि आज भी उनके गॉव के बाहर बंजारे की आत्मा उन्हें रात के 12 बजे हो या दोपहर के 12 परेशान करती है .

कौन है वो गॉव

कानपुर जनपद के घाटमपुर कोतवाली क्षेत्र के पतारा रेलवे स्टेशन के पास स्थित गॉव रघुनाथपुर जहां के ग्रामीणों का दावा है कि उन्हें व उनके बच्चों को एक नही बल्कि कई बार बंजारे की आत्मा द्वारा उनका नाम लेकर आवाज दी गयी और जिस किसी ने भी आवाज सुनकर पीछे मुड़कर देखा तो समझ लो वो अचानक खूद ब खुद हवा में उछलकर जमीन पर गिर जाता है उसके बाद तांत्रिक द्वारा जब झाड़ फूंक होती है तभी वो सही हो पाता है .

क्या है कहानी

रघुनाथपुर गॉव के पास से निकली बांदा कानपुर रेलवे लाइन के किनारे आज से तकरीबन 11 साल पहले एक बंजारा अपने कबीले के लोगो के साथ ट्रेन से जा रहा था तभी अचानक वो ट्रेन से गिर गया और उसकी मौत हो गयी बंजारे के साथियों ने उसे रेलवे ट्रैक से कुछ दूर पर ही दफनाते हुए उसकी समाधि बनाकर चले गए .

11 सालों से भटक रही है बंजारे की आत्मा

रघुनाथपुर के बुजुर्ग ने बताया कि जहां पर बंजारे की समाधी बनी हुई है वहां गॉव के लोगों के खेत भी है बंजारे की मौत के कुछ दिनों बाद से खेत मे आने जाने वाले लोगों को उसकी आत्मा आवाज देकर पुकारने लगी और जिसने भी पीछे मुड़कर देखा तो एक अदृश्य शक्ति द्वारा उसे उठाकर जमीन में पटक दिया जाता है यहां तक ग्रामीणों का ये भी कहना है कि यदि कोई बच्चा स्कूल से वापस लौटते वक्त 12 बजे के करीब उस जगह से निकल जाये और उसके हाथ मे कुछ खाने पीने की चीज होती है तो वो अचानक गायब हो जाती है .

रात में नही करता कोई खेतों में काम

बंजारे की आत्मा के डर से ग्रामीण खेतों में रात को 9 बजे के बाद नही जाते है यही हाल दोपहर 12 बजे के पास का भी है बंजारे की आत्मा ने ग्रामीणों को डर के साये में जीने को मजबूर कर दिया है ।रात 9 बजे के बाद वहां पर परिंदा भी नही पर मारता है .

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