स्वाइन फ्लू: स्वास्थ्य महकमे की लेटतलीफी ने ले ली 75 लोगों की जान, सामने आए 1911 पॉजिटिव केस।

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राजस्थान|राज्य सरकार के स्वास्थ्य महकमे की लेटलतीफी प्रदेश के 75 लोगों पर भारी पड़ चुकी है. प्रदेश में भयावह रूप ले चुके स्वाइन फ्लू ने गत 28 दिनों में अब तक 75 पीड़ितों की जान ले ली. वहीं 1911 पॉजिटिव केस सामने आ चुके हैं. स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और जागरुकता के अभाव में स्वाइन फ्लू अब खौफ का पर्याय बन गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि जितने प्रयास सरकार अब कर रही है उतने अगर पहले कर लिए जाते तो शायद इसके फैलाव पर कुछ हद तक लगाम लगाई जा सकती थी.

प्रदेश में स्वाइन फ्लू से मौतों का सिलसिला अभी थमा नहीं है. तेज सर्दी के चलते स्वाइन फ्लू का असर भी लगातार बढ़ा है. स्वाइन फ्लू पीड़ित 75 लोग अब तक दम तोड़ चुके हैं. प्रतिदिन पॉजिटिव मरीजों और मृतकों की संख्या बढ़ती जा रही है. प्रदेशभर में स्वाइन फ्लू के अब तक 1911 पॉजिटिव केस सामने आ चुके हैं. सोमवार को भी जयपुर में 20 पॉजिटिव रोगी मिले हैं. वहीं कोटा में 9 तथा बीकानेर और गंगानगर में 5-5 पॉजिटिव केस सामने आए हैं. सोमवार को प्रदेश में कुल 55 नए पॉजिटिव केस सामने आए.

अब जागी है सरकार, जांच सुविधाएं बढ़ाईस्वाइन फ्लू से निपटने के लिए सरकार की ओर किए जा रहे प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं. चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने अब घरों के साथ-साथ बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर भी स्क्रीनिंग शुरू करने के निर्देश दिए हैं. प्रदेश में बने पांचों नए राजकीय मेडिकल कॉलेजों में भी इसकी जांच सुविधा शुरू करने के लिए पांच करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं. इसके साथ ही 33 जिला चिकित्सालयों में स्वाइन फ्लू की जांच की व्यवस्था के लिए मशीनें व अन्य संसाधन उपलब्ध कराने को कहा है. प्रदेश में वर्तमान में 7 मेडिकल कालेजों, 1 डीएमआरसी और 4 निजी लैब सहित 12 स्थानों पर स्वाइन फ्लू की जांच सुविधा उपलब्ध है.

स्वाइन फ्लू के बेकाबू होने के एक नहीं कई कारण रहे हैं
विशेषज्ञों की मानें तो प्रदेश में स्वाइन फ्लू के बेकाबू होने के कई कारण हैं. सबसे पहला कारण तो स्वाइन फ्लू को सामान्य फ्लू मानते हुए इसे हल्के में लेना रहा. वहीं स्वाइन फ्लू के प्रति जनजागरुकता की भी काफी कमी रही है. स्वाइन फ्लू की रोकथाम के लिए सरकार के प्रयास देरी से शुरू किए गए. प्रयास शुरू हुए तो वे केवल शहरी क्षेत्रों तक ही सीमित रहे. इसकी रोकथाम के लिए ज्यादा प्रचार-प्रसार केवल शहरों में ही किया गया, ग्रामीण क्षेत्रों पर उतना ध्यान नहीं दिया गया, जितना दिया जाना चाहिए था. वहीं जागरुकता के अभाव में स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखते ही जांच व दवा का सेवन नहीं करने से भी यह तेजी से फैला

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