आसाराम को नहीं मिली सुप्रीम कोर्ट से राहत

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कोर्ट ने गुजरात सरकार को बचे गवाहों के बयान दर्ज कराने को कहा, गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद ही जमानत पर विचार

नई दिल्ली, 06 अप्रैल । सुप्रीम कोर्ट ने आज फिर आसाराम को राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद ही वो जमानत पर विचार करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को बचे गवाहों के बयान दर्ज कराने को कहा। मामले पर अगली सुनवाई मई के पहले हफ्ते में होगी।

पिछले 22 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अभी हमें इस केस की प्रोग्रेस रिपोर्ट नहीं मिली है। हमें जब प्रोग्रेस रिपोर्ट मिलेगी, हम आपके पहले जमानत याचिका पर विचार करेंगे। पिछले 15 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार से पूछा था कि गुजरात रेप केस में ट्रायल की स्थिति क्या है? कोर्ट ने गुजरात सरकार को निर्देश दिया था कि वो स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें। आसाराम पर अहमदाबाद की दो बहनों से रेप का आरोप है।

पहले की सुनवाई के दौरान आसाराम ने मुकदमा धीमी गति से चलने की शिकायत की थी। इस पर जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता वाली बेंच ने गुजरात सरकार को फटकार लगाते हुए पूछा था कि आसाराम के ट्रायल में इतनी देर क्यों हो रही है। कोर्ट ने कहा था कि रेप पीड़िता सबसे प्रमुख गवाह होती है और उसका ही बयान अभी तक क्यों नहीं हुआ है।

आसाराम की दलील थी कि अब तक रेप का आरोप लगाने वाली महिला का बयान कोर्ट में दर्ज नहीं हुआ है। आसाराम के खिलाफ गुजरात में ट्रायल कोर्ट की धीमी रफ्तार पर सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया था कि वो तय समय सीमा में ट्रायल पूरा करें। आसाराम की ओर से कहा गया था कि अब तक 93 गवाहों में से अब तक मात्र 30 गवाहों के बयान दर्ज किए जा सके हैं।

यौन उत्पीड़न के आरोप में आसाराम को 2013 में गिरफ्तार किया गया था। 20 अगस्त 2013 को उनके खिलाफ जोधपुर आश्रम में यौन शोषण का मामला दर्ज कराया गया था। इसके अलावा सूरत की दो बहनों ने भी 2001 में आश्रम में दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था।

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