कानपुर : जो बड़े बड़े अस्पतालों में न हो सका उसे बिधनू सीएचसी के डॉक्टरों ने कर दिखाया

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वर्ल्ड खबर एक्सप्रेस न्यूज
कानपुर : यूपी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में संसाधनों के अभाव के चलते सीरियस सर्जिकल केस नही किये जाते है लेकिन बिधनू सीएचसी के डॉक्टरों ने एक साल से हॉस्पिटल दर हॉस्पिटल भटकने के बाद भी खुद के पैरों में खड़ी होने में लाचार युवती के पंजे की सर्जरी करके एक मिशाल कायम की है .

जानिए क्या है पूरा मामला
बिधनू के करसुई गॉव निवासी रामबाबू गुप्ता किसान है बीती 22 मार्च 2017 को रामबाबू अपनी बेटी हिमांशी को लेकर 12 वीं का शिक्षाशास्त्र का पेपर दिलाने जा रहे थे तभी गल्लामंडी के पास उनकी बाइक पर ट्रक ने टक्कर मार दी टक्कर लगते ही हिमांशी बाइक से गिर गयी और उसका बायां पैर ट्रक के पहिये के नीचे आकर बुरी तरह इंजर्ड हो गया .

1 साल में खर्च हुए 5 लाख से ज्यादा रुपये
हादसे के बाद रामबाबू ने अपनी बेटी को 22 दिनों तक नौबस्ता इलाके के निजी अस्पताल में भर्ती किया जहां पर से डॉक्टरों ने किसान से तकरीबन 1.5 लाख रुपये इलाज के नाम पर लेते हुए हिमांशी को कानपुर मेडिकल कॉलेज भेज दिया . हिमांशी का इलाज 15 दिनों तक मेडिकल कॉलेज में हुआ और वहां के डॉक्टरों ने भी हाथ खड़े कर दिए और उसे लखनऊ मेडिकल कॉलेज रिफर कर दिया रामबाबू बेटी को खुद के पैरों फिर से चलने के ख्वाब देख रहा था जिसके चलते वो अपनी बेटी को लेकर लखनऊ मेडिकल कॉलेज पहुंचा जहां पर डॉक्टरों ने पैर की सर्जरी के लिए कहां और अगले 3 महीने बाद ऑपरेशन की तारीख दी .

रामबाबू अपनी बेटी के दर्द को नही देख पा रहा था उस पर से लखनऊ मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों द्वारा दिया गया 3 महीने का समय जिसके चलते रामबाबू हिमांशी को लेकर कानपुर वापस आ गया और स्वरूप नगर इलाके के एक नामचीन निजी अस्पताल में उसे भर्ती कराया जहां पर डॉक्टरों ने उसके पैर के ऊपर के हिस्से को सही करने में 3 लाख रुपये लेते हुए 4 महीनों तक इलाज किया और उसके बाद हिमांशी को बैशाखी थमा दी .

टूटते सपनों के बीच भगवान बनें सीएचसी के डॉक्टर

हिमांशी बैशाखी को ही अपना सहारा मान बैठी थी तभी उसकी जिंदगी में यूटर्न आया और उसके पिता उसे लेकर बिधनू सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे जहां पर मौजूद सर्जन डॉ मिनी अवस्थी व अर्थों के सर्जन आर. के .गौतम ने हिमांशी के पंजे की जांच करते हुए 15 मार्च को भीतरगॉव सीएचसी के एन्सपेटिक सर्जन डॉ अजय मौर्य को बुलाते हुए पंजे की नि: शुल्क प्लस्टिक सर्जरी की और 20 दिनों के अंदर ही हिमांशी के पंजे में काफी सुधार देखने को मिल रहा है डॉक्टरों का कहना है कि अब जल्द ही हिमांशी अपने पैरों पर खड़ी हो सकेगी.

क्या बोले चिकित्साअधिक्षक
बिधनू सीएचसी के अधीक्षक डॉ एसपी यादव ने कहा कि यहां पर संसाधनों के अभाव के चलते इतनी बड़ी सर्जरी होना पॉसिबल नही थी दोनों डॉक्टरों ने सर्जरी करने के बाद एक मिशाल कायम की है .

रामबाबू ने देखे धरती में भगवान
हिमांशी के पिता ने अपनी बेटी के इलाज में अपने जीवन भर की कमाई लगा दी थी और उसके बाद भी वो खुद के पैरों पर नही खड़ी हो पा रही थी . रामबाबू ने बताया कि उनके लिए दोनों ही डॉक्टर उनके परिवार व उनकी बेटी के लिए भगवान है जिन्होंने नि: शुल्क इलाज करते हुए उनकी बेटी के चहरे में मुश्कान बिखेर दी है .

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