बैंको ने मिनिमम बैलेंस स्कीम के जरिए जनता के दबाए १० हजार करोड़

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नई दिल्ली : सरकार ने संसद में दिए आंकड़ों के मुताबिक मिनिमम बैलेंस रखने के नाम पर बैंको ने जनता से 3 सालो में १० हजार करोड़ वसूल किए है। जिन लोगोने अपने बचत खाते में न्यूनतम राशि (मिनिमम बैलेंस) को बनाए नहीं रखा।

यह रकम सेविंग अकाउंट में न्यूनतम बैलेंस न रखने और एटीएम विद्ड्रॉल पर लगने वाले चार्ज के जरिए एकत्रित की गई है। अब सवाल ये उठता है की ये बैंको की मिनिमम बैलेंस स्कीम किसके लिए है…? इसका सीधा फायदा किस को होता है…? और किसको इसका नुकशान…?

वाकई में दोस्तों मुझे नहीं पता है की ये मिनिमम बैलेंस स्कीम किसके लिए है !! पर मुझे ऐसा लगता है की इसका सीधा मतलब सरकार या बैंक से है। क्योकि देश में चल रही आर्थिक मंदी को छिपाने के लिए कही न कही ये कदम उठाया गया है।

सरकार या बैंक अपनी आर्थिक ऊंचाई दिखाने के लिए लोगो पर यानि जनता पर मिनिमम बैलेंस का बोज डाल रही है। चलो शायद ऐसा मन भी ले की सरकार या बैंक ने ये कदम जनता के भले के लिए उठाया है पर इस स्कीम से जनता का क्या भला हुआ है ऐसे तो कोई आंकड़े सामने नहीं आये है तो इसका सिध अर्थ ये निकलता है की है की न्यूनतम बैलेंस वाली स्कीम सिर्फ और सिर्फ सरकार के लिए है। सामान्य जनता के लिए नहीं है।

सरकार ने यह जानकारी संसद में दिए गए डेटा में बताई है। संसद में पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में सरकार ने बताया है कि साल 2012 तक मंथली एवरेज बैलेंस पर एसबीआई चार्ज वसूल कर रहा था, लेकिन 31 मार्च 2016 से यह बंद कर दिया गया। प्राइवेट बैंकों सहित अन्य बैंक अपने बोर्ड के नियमों के अनुसार यह चार्ज वसूल कर रहे हैं

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