नियमों में बदलाव से मार्च तक बंद हो जाएंगे 50% ATM

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नई दिल्ली : ए.टी.एम. के हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, मैनेजमैंट के मानकों व अपग्रेड में बदलाव के चलते देश के 50 प्रतिशत ए.टी.एम. मार्च तक बंद हो सकते हैं, कन्फैडरेशन ऑफ ए.टी.एम. इंडस्ट्री (सी.ए.टी.एम.आई.) द्वारा यह आशंका जताई जा चुकी है।

आधे ए.टी.एम. बंद हो जाने से बैंकों में फिर से भीड़ बढ़ जाएगी और लोगों को पहले की तरह लाइन में लगकर पैसे निकलवाने पड़ेंगे। ए.टी.एम. बंद होने की मार नोटबंदी की तरह साबित हो सकती है। इसके चलते जहां जनसाधारण को दिक्कत उठानी पड़ेगी वहीं बैंकों पर भी काम का लोड बढ़ जाएगा।

जानकारी के मुताबिक ए.टी.एम. में कैश डालने के लिए कैसेट स्वैप मैथेड में बदलाव किया जा रहा है, इसके चलते कंपनियों द्वारा ए.टी.एम. चलाना मुश्किल हो जाएगा जिसके चलते कंपनियों को मजबूरन इन्हें बंद करना पड़ेगा। बताया जा रहा है कि कैश लॉजिस्टिक्स और कैसेट स्वैप के नए मैथेड पर करीब 3,000 करोड़ रुपए खर्च करने पड़ेंगे। इसके अलावा ए.टी.एम. के लिए दूसरे मानकों में भी बदलाव किया गया है। ए.टी.एम. चलाने वाली कम्पनियों के पास इतनी बड़ी रकम खर्च करने के लिए पैसे नहीं हैं।

मौजूदा समय में देश में करीब 2.38 लाख ए.टी.एम. हैं, इनके जरिए बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता है, यदि आधे बंद हो जाएंगे तो इसका बेहद बुरा प्रभाव पड़ेगा। ए.टी.एम. के बंद होने से लाखों लोगों की नौकरियां चली जाएंगी।
बताया जा रहा है कि ए.टी.एम. चलाने वाली कम्पनियां मार्च 2019 तक करीब 1.13 लाख ए.टी.एम. बंद करने को मजबूर हो जाएंगी। बंद होने वाले ए.टी.एम. में से करीब एक लाख ऑफ-साइड ए.टी.एम. होंगे, जबकि 15,000 से ज्यादा व्हाइट लेबल ए.टी.एम. होंगे। अधिकतर ए.टी.एम. गैर-शहरी क्षेत्र से होंगे, ये उन जगहों पर लगे हैं जहां पहले से ए.टी.एम. की काफी कमी है।

ऐसे में गैर-शहरी क्षेत्र के लोगों को बड़ी दिक्कत झेलनी पड़ेगी क्योंकि वहां पर एक तरफ जहां ए.टी.एम. कम हैं वहीं बैंक भी दूर-दराज के इलाकों में स्थित हैं। इससे कमजोर वर्ग के लोगों को बैंकिंग सेवाओं के दायरे में लाने की सरकार की कोशिशों को झटका लग सकता है, ये लोग सरकारी सबसिडी का पैसा निकालने के लिए भी ए.टी.एम. का इस्तेमाल करते हैं।
सी.ए.टी.एम.आई. का कहना है कि इस समस्या का एकमात्र समाधान यह है कि बैंक मानकों को पूरा करने पर आने वाले अतिरिक्त खर्च का बोझ उठाएं। उसने कहा है कि जब तक ए.टी.एम. चलाने वाली कम्पनियों को यह खर्च करने में बैंकों की तरफ से मदद नहीं मिलती है, तब तक बड़ी संख्या में ए.टी.एम. के बंद होने के आसार बने रहेंगे।

बैंकों को यदि वर्क लोड बढऩे से बचना है तो उन्हें उक्त राशि खर्च करनी पड़ सकती है। बैंकिंग सेवा में सुधार लाने की बातें की जा रही हैं लेकिन यदि ए.टी.एम. बंद हो जाएंगे तो इसका उलटा असर पड़ेगा जिसकी मार जनता को झेलनी पड़ेगी

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