ISRO चीफ का ऐलान- दिसंबर 2021 में भारतीयों को लेकर उड़ेगा मिशन गगनयान

0
85

नई दिल्ली/बेंगलुरु : साल 2021 तक पहली बार ISRO के सैटेलाइट से कोई भारतीय अंतरिक्ष में जाएगा। इस बात का ऐलान आज ISRO के चेयरमैन के सिवन ने किया। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने पिछले साल की उपलब्धियां गिनाते हुए आज 2019 के लक्ष्यों और अपने बहुप्रतीक्षित महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन की तैयारियों के बारे में कई खास बातें बताईं।

इस मिशन के तहत तीन सदस्यीय क्रू कम से कम 7 दिन के लिए अंतरिक्ष की यात्रा पर जाएगा। इसकी फाइनल लॉन्चिंग से पहले दो मानव रहित मिशन भी अंतरिक्ष में भेजे जाएंगे। मोदी सरकार ने पिछले साल ही 10 हजार करोड़ की महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दी थी। इसरो की सबसे बड़ी प्राथमिकता गगनयान है,

पहली डेडलाइन अनमैंड मिशन के लिए दिसंबर 2020 तय की गई है, दूसरी डेडलाइन अनमैंड मिशन के लिए जुलाई 2021 तय की गई है। पहले मानवीय मिशन के लिए दिसंबर 2021 का समय तय किया गया है। अंतरिक्ष पर मानव मिशन भेजने वाला भारत दुनिया का चौथा देश होगा।

गगनयान के लिए शुरुआती ट्रेनिंग भारत में होगी और अडवांस ट्रेनिंग रूस में हो सकती है। इसी के साथ महिला अंतरिक्षयात्री भी टीम का हिस्सा होंगी। अंतरिक्ष में मानवीय मिशन के लिए जरूरी उच्च तकनीक का विकास कर लिया गया है। इसके तहत अंतरिक्षयात्री 7 दिन तक स्पेस में रहेंगे। इसरो प्रमुख के सिवन ने 2018 की उपलब्धियां भी गिनाईं। पिछले साल ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी-सी 40) के जरिए 28 विदेशी उपग्रहों के साथ 31 उपग्रहों का प्रक्षेपण और उन्हें सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया गया।

सिवन ने इसरो की 2018 की उपलब्धियां साझा करते हुए कहा, कई रॉकेट और उपग्रहों के प्रक्षेपण के साथ यह साल काफी व्यस्तताओं वाला रहा। सबसे बड़ी उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गगनयान की घोषणा रही। यह एक प्रमुख घोषणा है। उन्होंने बताया, जीसैट-20, जीसैट-29 सैटलाइट इस साल होंगे लॉन्च, सितंबर,अक्टूबर तक आने वाले इस सैटलाइट से हाई स्पीड कनेक्टिविटी को बल मिलेगा।
डिजिटल इंडिया के सपने को पूरा करने में मिलेगी मदद। इसरो की इस साल 32 मिशन की प्लानिंग है। गगनयान मिशन पर पिछले चार महीने से काम चल रहा है। क्रू की ट्रेनिंग पर काम शुरू किया जा चुका है।

क्रू मेंबर का चुनाव इसरो और आईएएफ द्वारा संयुक्त रूप से किया जाएगा। इसके बाद उन्हें 2 से 3 साल तक ट्रेनिंग दी जाएगी। हम देश भर में 6 इंक्यूबेशन ऐंड रिसर्च सेंटर स्थापित करेंगे। हम भारतीय छात्रों को इसरो में लाएंगे। भारतीय छात्रों को नासा जाने की क्या जरूरत है?

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here