उत्‍तराखंड : आपदा से निबटने के लिए 16 हजार की फौज तैयार

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देहरादून
आपदा के लिहाज से बेहद संवेदनशील उत्तराखंड में अब किसी भी तरह की आपदा के बाद खोज एवं बचाव कार्य तुरंत प्रारंभ हो सकेंगे। नौ सालों के प्रयास के बाद प्रदेश की 670 न्याय पंचायतों में से 656 में 16571 को खोज एवं बचाव कार्य के मद्देनजर पारंगत कर लिया गया है। आपदा अथवा दुर्घटना की स्थिति में ये सभी लोग अपने-अपने क्षेत्रों में सरकारी मशीनरी का इंतजार किए बगैर तुरंत बचाव कार्य में जुटेंगे। यह किसी से छिपा नहीं है कि विषम भूगोल वाला समूचा उत्तराखंड आपदा के दृष्टिगत बेहद संवेदनशील है। इसीलिए राज्य में आपदा प्रबंधन मंत्रालय अस्तित्व में है, लेकिन अभी भी आपदा या फिर सड़क हादसों के बाद खोज एवं बचाव कार्यों में मानव संसाधन की कमी एक बड़ी समस्या के रूप में सामन आ रही थी।
आपदा प्रबंधन मंत्रालय ने ग्राम स्तर पर ऐसे लोगों की टीमें गठित करने का निर्णय लिया, जो खोज एवं बचाव कार्यों में पारंगत हों। इसके लिए वर्ष 2010 से न्याय पंचायत वार 20 से 25 लोगों को चयनित कर उन्हें ट्रेंड करने का बीड़ा उठाया गया। यही नहीं, इन दलों को खोज एवं बचाव कार्यों के लिए जरूरी साजोसामान देने का निर्णय लिया गया। डीएमएमसी के अधिशासी निदेशक डॉ.पीयूष रौतेला के मुताबिक बीते नौ सालों में हुए अथक प्रयासों के बाद हरिद्वार और ऊधमसिंहनगर को छोड़कर शेष 11 जिलों की 656 न्याय पंचायतों में 16571 लोगों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। ये सभी किसी भी तरह की आपदा की स्थिति में खोज एवं बचाव कार्यों में तुरंत जुट सकेंगे। इन सभी के बारे में संबंधित जिलों को मोबाइल नंबर समेत संपूर्ण ब्योरा दे दिया गया है।
डीएमएमसी की साइट में भी पूरा डाटा अपलोड किया गया है। डीएमएमसी ने अब आपदा के लिहाज से अधिक संवेदनशील सात जिलों पिथौरागढ़, बागेश्वर, चमोली, रुद्रप्रयाग, अल्मोड़ा, पौड़ी व चंपावत के आठ-आठ गांवों में भी न्याय पंचायतों की भांति टीमें गठित करने का निर्णय लिया है। डीएमएमसी के अधिशासी निदेशक के मुताबिक इन गांवों में ग्रामीणों को एक फरवरी से 21 मई तक खोज, बचाव एवं प्राथमिक चिकित्सा का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका खाका तैयार करने के साथ ही टीम लीडर भी नियुक्त कर दिए गए हैं।

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