पेमेंट के इंतजार में सरकार को 9 हजार करोड़ का लाभांश देने वाली HAL

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बेंगलुरु
हथियार निर्माण करने वाली भारत की सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रही है। इस संकट से निकलने के लिए कंपनी को रक्षा मंत्रालय के पास लटकी पेमेंट मिलने का इंतजार है। इसी बीच एक नई जानकारी सामने आई है। फिलहाल अपने कर्मचारियों को सैलरी देने के लिए उधार लेने वाली HAL ने 2003 से 2018 के बीच सरकार को 9 हजार करोड़ का लाभांश दिया था। इस राशि में से 50 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ पिछले 5 सालों में ही दिया गया है।
कुल 8,996 रुपए लाभांश के तौर पर दिए गए, इनमें से 4,366 रुपये केंद्र ने दस साल में 2003 से लेकर 2013 के बीच एकत्रित किए। इसके बाद के 5 सालों में 4,630 करोड़ रुपए लाभांश लिया गया। HAL कर्मचारियों के संगठन के महासचिव सुर्यदेव चंद्रशेखर मानते हैं कि पिछले 3 सालों में सरकार ने कंपनी के शेयरों का दो बार बायबैक किया। यह HAL के 75 सालों के इतिहास में पहली बार उठाए गए कदम थे। उनका मानना है कि इसने HAL की आर्थिक हालत पर जरूर असर डाला। बता दें कि HAL के वे दो बायबैक कुल 6,393 करोड़ रुपए के थे। इसमें से पहला 2015 (5,265 करोड़) में और दूसरा 2017 (1,128) में किया गया।
इस तरह 2013-14 से 2017-18 के बीच HAL ने केंद्र को 11 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा रकम दी। पिछले 10 सालों में इस पब्लिक सेक्टर यूनिट ने केंद्र को जितनी रकम दी यह उसका दोगुने से भी ज्यादा है। आज की तारीख में भी इंडियन एयर फोर्स, आर्मी और नेवी ने HAL के 15,700 करोड़ रुपए की पेमेंट नहीं की है। यह पैसा उनको दिए गए साजो-सामान और सर्विस का है। इसमें से 14,500 करोड़ रुपये तो सिर्फ इंडियन एयरफोर्स पर बकाया है। वायुसेना ही इस पब्लिक सेक्टर यूनिट की सबसे बड़ी कस्टमर है।

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