कानपुर : मधुमक्खियों के हमले से वृद्धा की मौत, 24 घायल

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कानपुर, 05 अप्रैल। गंगा किनारे बेटी का मुंडन कराने गये ग्रामीणों पर गुरुवार को मधुमक्खियों ने हमला कर दिया, जिससे अफरा-तफरी मच गई। कुछ लोग मधुमक्खियों से बचने के लिए गंगा में कूद गए। मधुमक्खियों के हमले से एक वृद्धा की मौत हो गई और करीब 24 लोग घायल हो गए।


बिल्हौर थाना क्षेत्र के सिधौली निवासी राम किशोर गुरुवार को गंगा के किनारे आकिन घाट पर ग्रामीणों को लेकर अपनी छह माह की बेटी का मुंडन कराने पहुंचे थे। मुंडन में गांव से करीब 60 पुरुष, महिलाएं व बच्चे तीन ट्रैक्टरों से गये हुए थे। इसी दौरान एक पेड़ के नीचे हवन किया जाने लगा और पेड़ पर मधुमक्खी का छत्ता था। हवन का धुआं लगने से मधुमक्खियां उड़ने लगी और मुंडन कराने आये लोगों पर हमला कर दिया। इससे घाट पर अफरा-तफरी मच गई। मधुमक्खियों का हमला देख कुछ लोगों ने तो गंगा में कूदकर अपनी जान बचाई। बच्चे व महिलाओं की चीख-पुकार से पास के गांव के लोग आए और आग जलाकर मधुमक्खियों को भगाया। इसके बाद सभी घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां पर ग्राम प्रधान मोती लाल की भाभी कमला देवी (68) की मौत हो गई।



थानाध्यक्ष ने बताया कि मधुमक्खियों के हमले से एक वृद्धा की मौत हो गई है। बाकी करीब 24 घायलों का इलाज चल रहा है। घायलों में महिलाएं व बच्चे भी शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि एक माह पहले गोविन्द नगर थानाक्षेत्र में एक दंपति पर मधुमक्खियों ने हमला कर दिया था, जिसमें कारोबारी पति सतनाम मुंजवानी (60) की मौत हो गई थी और पत्नी गौरी करीब एक सप्ताह तक अस्पताल में भर्ती रही।

यह करें उपाय
कानपुर प्राणि उद्यान के निदेशक दीपक कुमार ने बताया कि एक मधुमक्खी 1100 बार डंक मार सकती है, जिसका असर हर व्यक्ति में अलग-अलग होता है। अगर मधुमक्खी काट ले तो बर्फ, शहद या टूथपेस्ट में जो भी मिल जाए उसे तत्काल डंक मारने वाली जगह पर लगा लें, जिससे बहुत फायदा मिलता है। शहद जहर को फैलने नहीं देता है और इसका एंटी-बैक्टीरियल गुण संक्रमण बढ़ने नहीं देता है। बर्फ भी ठंड की वजह से विषाक्त पदार्थ को बहुत अधिक फैलने नहीं देता है। इसके अलावा यह दर्द कम करने में भी फायदेमंद होता है। टूथपेस्ट जहर के अम्लीय प्रभाव को कम करता है। इसके इस्तेमाल से दर्द और सूजन में राहत मिलती है।

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