क्यों वापस लेना पड़ा फर्जी खबर देने पर पत्रकारों की मान्यता रद्द करने वाला फरमान?

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नई दिल्ली, 03 अप्रैल । फर्जी खबर देने पर पत्रकारों की मान्यता रद्द करने वाला फरमान केन्द्रीय सूचना प्रसारण मंत्रालय और उसकी शक्तिशाली केन्द्रीय मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी को क्यों वापस लेना पड़ा, इसको लेकर तरह-तरह की चर्चा शुरू हो गई है।


1- सोमवार, 02 अप्रैल: सूचना प्रसारण मंत्रालय, जिसकी कबिना मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी हैं, ने एक विज्ञप्ति जारी की कि पत्रकारों की मान्यता के लिये संशोधित दिशा-निर्देशों के मुताबिक यदि कोई पत्रकार फर्जी खबर करते हुए, उसका दुष्प्रचार करते हुए पाया गया और उसके फर्जी खबर प्रकाशन या प्रसारण की पुष्टि होती है, तो पहली बार ऐसा करते पाये जाने पर पत्रकार की मान्यता 6 माह के लिये निलंबित कर दी जायेगी। दूसरी बार में एक साल के लिए और तीसरी बार उल्लंघन करने पर मान्यता स्थाई रूप से रद्द कर दी जायेगी। फर्जी खबर प्रिंट मीडिया से संबद्ध है तो भारतीय प्रेस परिषद , इलेक्ट्रानिक मीडिया से संबद्ध है तो न्यूज ब्राडकास्टर एसोसियेशन को भेजी जायेगी। इन दोनों को 15 दिन में निर्णय करना होगा कि खबर फर्जी है या नहीं।


इस फरमन को लेकर सोमवार से ही पत्रकारों और विपक्षी दलों ने केन्द्र सरकार द्वारा मीडिया पर सेंसर लगाने का एक और आसान तरीका अपनाने का आरोप लगाना शुरू कर दिया।
2– मंगलवार, 03 अप्रैल: एक नामी अंग्रेजी अखबार के पहले पन्ने पर सेकेंड लीड प्रकाशित हुई है- ‘मोव्स कम्स इन इलेक्शन इयर, इन नेम्स आफ फेक न्यूज, गवर्नमेंट फ्रेम्स रूल्स टू ब्लैकलिस्ट जर्नालिट्स’। इसी सेकेंड लीड में ही एक और शार्षक वाली खबर प्रकाशित है-‘लूक हू इज बस्टींग फेक न्यूज फार 13 मिनिस्टर्सः साइट विद एग्जाम वारियर्स लिंक ‘।


अग्रेजी दैनिक के इसी, 13 मंत्री व साइट लिंग वाली खबर ने सूचना प्रसारण मंत्रालय, उसके सुपर पावरफुल मंत्री के पावर सेंटर को यू टर्न लेने पर मजबूर कर दिया। क्योंकि नामी अंग्रेजी अखबार में यह खबर 3 अप्रैलश, 2018 को आने और उसे पढ़ने के बाद विपक्षी दलों ने फेक न्यूज प्रचारित करने वाले तथाकथित 13 मंत्रियों को मंत्री पद से हटाने, उनके व साइट के विरुद्ध जांच की मांग करने को लेकर विचारञविमर्श शुरू कर दिया है। पत्रकारों व जनता ने भी कहना शुरू कर दिया है कि जब मंत्री, पार्टी पदाधिकारी, सांसद, विधायक ही फर्जी खबर देंगे तो हम क्या करेंगे। उनके कहे को नहीं लिखते हैं, नहीं प्रचारित करते हैं तो नौकरी जायेगी।

 

 

 

 

 

 

 

 

लिखते हैं तो फर्जी खबर लिखने के आरोप में नौकरी जायेगी, इसलिए सरकार फर्जी खबर लिखने पर पत्रकारों की पीआईबी मान्यता जरूर रद्द करे, लेकिन जो मंत्री, सांसद, विधायक, अफसर, पार्टी पदाधिकारी फर्जी खबर देता है (चाहे वह कहीं से भी लेकर देता है), तो उसकी भी सांसदी और विधायकी रद्द की जाये। पद से हटाया जाये और तीन बार ऐसा करने पर उसको हमेशा के लिए हटाकर, उसके राजनीति करने या पद वापस पाने पर बैन लगा दिया जाये।


इस मामले में इस तरह घिरने के बाद सूचना प्रसारण मंत्रालय, उसके सुपर मंत्री, उसके सुपर पावर सेंटर को मंगलवार 3 अप्रैल, 2018 की दोपहर 12 बजे के लगभग यू टर्न लेना पड़ा।

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