बुंदेलखण्ड में ग्रीन इनर्जी कारिडोर में होगा 5500 करोड़ रुपये का निवेश: ब्रजेश पाठक

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत मंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि राज्य सरकार ने सौर ऊर्जा से विद्युत उत्पादन में निजी भागीदारी को बढ़ावा देने की व्यवस्था की है। निजी निवेश को आकृष्ट करने हेतु अनेक सुविधाएं उद्यमियों को दी जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि सोलर पावर परियोजनाओं और सोलर पार्क, जिसमें एक साथ कई सौर पावर परियोजनाएं स्थापित की जा सकती हैं, के विकास का प्राविधान किया गया है। श्री पाठक ं पीएचडी चैम्बर्स आॅफ कामर्स एण्ड इंडस्ट्रीज और यू0पी0 नेडा द्वारा संयुक्त रुप से आयोजित उप्र ग्रीन इनर्जी समिट का शुभारम्भ करने के उपरान्त उद्यमियों को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा के प्रोत्साहन के लिए आॅनलाइन सिंगल विंडो क्लीयरेंस की व्यवस्था की गई है।

सोलर पावर परियोजनाओं की स्थापना हेतु शत-प्रतिशत स्टाम्प ड्यूटी में छूट का प्राविधान किया गया है। इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी में 10 सालों के लिए शत-प्रतिशत छूट दी जाएगी। अब थर्ड पार्टी को पावर सेल अनुमन्य किया गया है। उन्होंने कहा कि पावर सेल पर इन्ट्रा स्टेट में ट्रांसमिशन चार्जेज पर 50 प्रतिशत तथा इंटर स्टेट पर 100 प्रतिशत की छूट देने का प्राविधान किया गया है।

इसके अलावा सौर ऊर्जा परियोजनाओं को अन्य प्रोत्साहन भी दिए जा रहे हैं। सौर ऊर्जा कार्यक्रमों के आयोजन में पीएचडी चैम्बर्स आॅफ कामर्स के कार्यों की सराहना करते हुए श्री पाठक ने कहा कि वह उद्यमियों को इस क्षेत्र में आकृष्ट करने मंे अग्रणी भूमिका का निर्वहन करें। उन्होंने कहा कि बुंदेलखण्ड और पूर्वांचल में स्थापना हेतु 05 मेगावाट एवं इससे अधिक क्षमता की सोलर पावर परियोजनाओं के ग्रिड संयोजन हेतु पारेषण लाइन पर आने वाला व्यय अब राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।

इसके अलावा बंुदेलखण्ड में सौर विद्युत परियोजनाओं को बढ़ावा देने हेतु 4000 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए ग्रीन इनर्जी कारिडोर का निर्माण कराया जाएगा। इस क्षेत्र में पारेषण तंत्र के विकास पर करीब 55 सौ करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत मंत्री ने पीएचडी चैम्बर्स से अपील की कि राज्य सरकार द्वारा प्रख्यापित सौर ऊर्जा नीति-2017 का व्यापक रुप से प्रचार-प्रसार अपने स्तर से सुनिश्चित करें, ताकि सरकार की इस नीति के बारे में उद्यमियों और निवेशकों को विस्तार से जानकारी उपलब्ध हो सके।

उप्र ग्रीन इनर्जी समिट को अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत के प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने सम्बोधित करते हुए कहा कि उप्र में वैकल्पिक ऊर्जा के दो मुख्य स्रोत बायो इनर्जी एवं सोलर इनर्जी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि उ0प्र0 सरकार द्वारा जारी की गई नई ऊर्जा नीति-2017 के अंतर्गत ग्राउण्ड माउण्टेंट द्वारा अत्यंत प्रतिस्पर्धात्मक दरें प्रस्तावित की गई हैं। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा से विद्युत पारेषण लागत ज्यादा आती है, इस कारण ग्रीन कारिडोर का विकास किया जाना प्रस्तावित है, जिसकी सैद्धांतिक सहमति केन्द्र सरकार द्वारा दे दी गई है।

इस अवसर पर निदेशक यूपी नेडा श्रीमती अमृता सोनी ने हितधारकों से संबंधित महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर चर्चा करते हुए कहा कि सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अत्यधिक भूमि की आवश्यकता होती है। इस कारण हमें सोलर पावर प्लांट की स्थापना के अन्य विकल्पों पर भी कार्य करने की आवश्यकता है।

सरकार ने इस दिशा में पहल करते हुए अनेक विकल्पों एवं बहुविकल्पों की व्याख्या की है। इस अवसर सचिव नेडा आलोक कुमार, पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन, पीएचडी चैम्बर्स के स्थानीय निदेशक सुश्री अनुराधा गोयल, सौर ऊर्जा विशेषज्ञ सहित उद्यमी उपस्थित थे।

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