कानपुर: मिला एक और मौका, वेब रजिस्ट्रेशन नंबर हासिल कर सकेंगे लॉ के छात्र

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कानपुर। छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय प्रशासन ने लॉ कॉलेजों के सैकड़ों छात्रों को वेब रजिस्ट्रेशन नंबर (डब्ल्यूआरएन) हासिल करने का एक और मौका दिया है। प्रशासन के इस फैसले से कई छात्रों को लाभ मिलेगा।

पिछले कई दिनों से डीसी लॉ, बीएनडी आदि अन्य कॉलेजों के छात्र-छात्राएं विवि में अफसरों के पास अपनी गुहार लेकर पहुंच रहे थे। उनका कहना था कि कॉलेज में प्रवेश तो हो गया पर वेब रजिस्ट्रेशन नंबर न होने के चलते वह परीक्षा फॉर्म नहीं भर पा रहे हैं। इसे लेकर दो दिन पहले छात्रों ने हंगामा भी किया था। कुलपति प्रो.नीलिमा गुप्ता ने प्रवेश समिति की बैठक कर वेब रजिस्ट्रेशन नंबर उपलब्ध कराने का निर्णय लिया।

उन्होंने बताया उन लॉ कॉलेजों को जहां पर यह समस्या थी, वह चार दिनों 10, 11, 12 और 13 दिसंबर तक अपने लॉग इन संचालित कर सकेंगे।
बैठक में महिला महाविद्यालय की सभी छात्राओं को भी दाखिला दिए जाने के निर्णय पर यह तय हुआ कि बीए तृतीय वर्ष में जो विषय होंगे, एमए में उन्हीं विषयों में दाखिला होगा। अन्य विषय में प्रवेश के लिए जिन महाविद्यालयों में सीटें रिक्त होंगी, वहां प्रवेश मिल पाएगा।

बैठक में प्रोफेसर संजय स्वर्णकार, सिस्टम मैनेजर डॉ.सरोज द्विवेदी, परीक्षा नियंत्रक एसएल पाल, उपकुलसचिव विद्यानंद त्रिपाठी आदि उपस्थित रहे।

तीन जनवरी से होंगी एलएलबी की परीक्षाएं
कई छात्र-छात्राओं के वेब रजिस्ट्रेशन नंबर पंजीकृत न होने के चलते वह कॉलेज भी नहीं जा पा रहे थे। जबकि विवि ने एलएलबी की 12 दिसंबर से शुरू होने वाली परीक्षाओं का कार्यक्रम जारी कर दिया था। लेकिन यह फैसला प्रशासनिक अफसरों ने बदला और अब तीन जनवरी 2019 से परीक्षाएं कराने का आदेश जारी किया गया। हालांकि विवि से जुड़े विशेषज्ञों ने कहा कि इस कदम से एलएलबी का सत्र देरी की भेंट चढ़ सकता है।

बीएड एमएड छात्र भी ले सकेंगे डब्ल्यूआरएन
जिन छात्र-छात्राओं ने बीएड व एमएड में प्रवेश लिया है, उन्हें भी वेब रजिस्ट्रेशन नंबर हासिल करना होगा। पहली बार यह फैसला विवि के अफसरों ने किया है।

क्या बोले जिम्मेदार
सीएसजेएमयू के कुलसचिव डॉ. विनोद कुमार सिंह ने बताया कि लॉ कॉलेजों में 14 अगस्त तक प्रवेश ले चुके उन छात्रों को मौका दिया गया है, जिन्होंने डब्ल्यूआरएन हासिल नहीं किया था। इसके अलावा किसी छात्र या छात्रा को कॉलेज में प्रवेश देने जैसा कोई फैसला नहीं किया गया है। वहीं उप्र विधि महाविद्यालय एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ.विनोद शुक्ला ने कहा कि विवि प्रशासन ने जो कदम उठाया है, वह छात्र हित को देखते हुए है। इसका स्वागत करते हैं

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