कानपुर : 16 साल की लड़की ने 16 राष्ट्रीय रिकार्ड के साथ बनाया नौ विश्व रिकार्ड

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कानपुर, 02 अप्रैल । संख्याओं को तेजी से जोड़ने और भाग (डिवाइड) करने 16 साल की छात्रा दिलप्रीत कौर का नाम इन दिनों कानपुर में ही नहीं पूरे देश में छाया हुआ है। उसने अपनी उम्र के बराबर अब तक राष्ट्रीय रिकार्ड और नौ विश्व रिकार्ड बना चुकी है। जिसके चलते उसे लोग कैलकुलेटर गर्ल नाम से भी पुकारने लगे हैं। अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उसकी गणित में जबरदस्त क्षमता को देखते हुए रानी लक्ष्मीबाई सम्मान से पुरस्कृत किया था।


नजीराबाद थानाक्षेत्र के गुमटी में रहने वाले मंजीत सिंह और उनकी पत्नी सिमरन गणित के अध्यापक हैं। मंजीत सिंह ने अपनी प्राचीन विधा एबैकस पद्धति से अपनी बेटी दिलप्रीत कौर ऐसी शिक्षा दी कि आज उनकी बेटी को लोग कैलकुलेटर गर्ल के नाम से पुकारने लगे। हडर्ड स्कूल में 10वीं कक्षा में पढ़ने वाली सोलह साल की दिलप्रीत इन दिनों दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही है। वह गणित के सवालों को इतनी तेजी से हल करती है कि देखने वाला हैरान रह जाता है।

जितनी देर में लोग अपनी पलक झपकाते हैं उतनी देर में वह दर्जन भर सवाल हल कर देती है। अपनी प्रतिभा के बल पर अब तक वह नौ विश्व रिकॉर्ड और 16 राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाने के साथ लिम्का बुक रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करा चुकी है। पिता मंजीत ने बताया कि दिलप्रीत का आईक्यू लेवल सामान्य बच्चों से कहीं ज्यादा है। वह हवा में जोड़-घटाना से लेकर बड़ी-बड़ी गणनाओं को पलक झपकते हल कर देती हैं। एक मिनट में वह सौ से ज्यादा जोड़ने, घटाने, गुणा और भाग के सवाल हल चुकी हैं। इसके साथ ही वह बीस मिनट में एक हजार सवालों को भी पूरा कर चुकी हैं।


बताया कि साल 2015 में दिलप्रीत ने एक प्रतियोगिता में आठ मिनट में 300 सवाल हल करने थे, लेकिन उन्होंने सात मिनट में ही प्रतियोगिता जीत ली थी। कैलकुलेटर गर्ल’ के नाम से जानी जाने वाली दिलप्रीत कौर ने एक मिनट में सबसे ज्यादा मैथमैटिकल कैलकुलेशन्स करने के कारण ये रिकॉर्ड अपने नाम किए। वह सुपरफास्ट स्पीड से संख्याओं का जोड़ घटाव और भाग कर लेती है।

पिता ने बताया कि एक बार दिल्ली में रही राष्ट्रीय प्रतियोगिता में केन्द्रीय मंत्री किरण रिजजू ने जब बच्ची का कैलकुलेसन देखा तो वह खुद को वीडियो बनाने से नही रोक पाए। वर्ष 2016 में ही दिल्ली में आयोजित एक प्रतियोगिता में दिलप्रीत ने वर्ड रिकॉर्ड बनाया था, जिसमे केंद्रीय मंत्री वीके सिंह ने सम्मानित किया था। गणित में जबरदस्त प्रतिभा को देखते उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने हाल ही में उसे रानी लक्ष्मीबाई वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया। इसके साथ ही एक लाख रूपए की धनराशि भी दी थी।
आईएएस बनना सपना
दिलप्रीत ने रविवार को खास बातचीत में बताया कि इंटर की परीक्षा के बाद आईआईटी की पढाई करूंगी। इसके बाद सिविल सर्विसेज की तैयारी कर आईएएस अधिकारी बनने का सपना है। जब पूछा गया कि गणित में कंप्यूटर जैसे दिमाग के पीछे किसको श्रेय देना चाहती हो तो कहा कि यह सब पिता की एबैकस पद्यति का कमाल है।
पिता का कहना
पिता मनजीत सिंह ने बताया कि मैं खुद अध्यापक हॅूं और बच्चों को एबैकस पढ़ाता हॅूं। इसी एबैकस विधि से ही दिलप्रीत ने कैलकुलेशन में इतनी महारथ हासिल की है। कहा कि एबैकस गणना की भारत की ही पुरानी तकनीक है जिस बाद में चीन ने अपना लिया। बताया कि इससे इसके बीड्स की फोटोग्राफिक इमेज माइंड में छप जाती है। बच्चों को एबैकस के एक-एक बीड को याद करवाया जाता है। उसका रो और कॉलम एक-एक चीज उसके दिमाग में बैठाते हैं। लगातार प्रैक्टिस से कोई भी कैलकुलेशन आसानी से हो जाती है।
हैरान हो गये थे डिप्टी सीटीएम
पिता ने बताया कि पिछले वर्ष लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड में नाम दर्ज कराना था। जिसके लिए क्लास वन गजटेड अफसर के सामने प्रस्तुति देनी पड़ती है। इसी के चलते पिछले वर्ष बेटी दिलप्रीत ने सेंट्रल स्टेशन के डिप्टी सीटीएम डॉ. जितेंद्र कुमार के सामने प्रस्तुत दी। बेटी की अद्भुत गणितीय क्षमता देख डिप्टी सीटीएम भी हैरान हो गये थे।

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