केंद्र ने घटाया UPA सरकार के आर्थिक विकास दर का आंकड़ा, भड़की कोंग्रस

0
42

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के 10 साल के शासनकाल में देश की आर्थिक विकास दर का आंकड़ा घटा दिया। नए तरीके से की गई गणना के बाद जारी आंकड़ों में यूपीए शासनकाल की जीडीपी में लगभग हर साल करीब 1 फीसदी की कमी कर दी गई है।

इस कवायद के लिए सरकार ने अर्थव्यवस्था के विकास की सही तस्वीर पेश करने का तर्क दिया है। लेकिन 2019 लोकसभा चुनावों से ठीक पहले हुई इस कार्रवाई के चलते राजनीतिक घमासान मचने के आसार खड़े हो गए हैं।

नीति आयोग के वाइस चेयरमैन राजीव कुमार और सांख्यिकी मंत्रालय सेक्रेटरी प्रवीण श्रीवास्तव ने केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) की तरफ से तैयार सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का बैक सीरीज डाटा जारी किया।

उन्होंने कहा कि इसमें ज्यादा क्षेत्र शामिल किए गए हैं, ताकि जीडीपी की गणना ठीक से हो। सरकार ने 2004-05 के बदले जीडीपी का साल बदलकर 2011-2012 किया है। जनवरी, 2015 में सरकार ने राष्ट्रीय खातों के लिए 2004-05 के बजाय 2011-12 को आधार वर्ष घोषित किया था। इससे पहले 2010 में यूपीए सरकार ने आधार वर्ष को बदला था।

राजीव कुमार ने कहा कि इस आंकड़े में ताजा सर्वेक्षण और जनगणना के डाटा को शामिल किया गया है। इसके अलावा नई सीरीज के रिटेल और थोक महंगाई के आंकड़े भी जोड़े गए हैं।

इसमें स्टॉक ब्रोकर, म्यूचुअल फंड कंपनी, सेबी, पीएफआरडीए और आईआरडीए को भी शामिल किया गया है। कुमार के मुताबिक, 2004-05 और 2011-12 के बेस ईयर बदलने पर एक कमेटी ने जीडीपी में 3 लाख करोड़ का अंतर बताया था। उन्होंने यह भी कहा कि इन आंकड़ों को पेश करने के पीछे सरकार की कोई गलत मंशा नहीं है। श्रीवास्तव ने भी कहा कि पुरानी और नई सीरीज के आंकड़ों की तुलना नहीं की जानी चाहिए। नई गणना पद्धति को शीर्ष सांख्यिकीविदों ने परखा है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here