कानपुर :मलेशिया में फंसे युवकों के परिजन सोमवार को विदेश मंत्रालय में लगाएंगे गुहार

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कानपुर, 31 मार्च। केन्द्र सरकार के सख्त नियमों के बावजूद कानपुर में कबूतरबाजों का धंधा चल रहा है। जिसके चलते एक कबूतरबाज ने मलेशिया में अच्छी नौकरी के नाम पर तीन युवकों से लाखों रूपए ऐठ लिये। इसके बाद उन्हे 15 दिन का वीजा बनवाकर वहां पर भेज दिया और अब वह वहां की पुलिस की गिरफ्त में है। जानकारी पर परिजनों ने जिला प्रशासन से गुहार लगाई पर कुछ हासिल होता न देख अब सोमवार को तीनों युवकों के परिजन विदेश मंत्रालय में गुहार लगाएंगे।

चकेरी थानाक्षेत्र के जाजमऊ बुढियाघाट निवासी मुसाफिर ने बताया कि बेटा मो. रईस (30) एक टेनरी में आठ हजार रूपए महीने पर काम करता था। इसी बीच पिछले वर्ष अक्टूबर माह में क्षेत्र के रहने वाले गुलफाम ने बेटे को मलेशिया की अता कंपनी में काम दिलाने का वादा किया। बताया गया कि वहां पर 1800 रिग्गित (मलेशियाई मुद्रा) प्रतिमाह मिलेगी जो भारतीय मुद्रा में करीब 30 हजार रुपये होगी। इसके एवज में उसने ने दो लाख रुपये मांगे। कहा कि बेटे के भविष्य को देखते हुए जोड़कर रखे 50 हजार रुपये और कुछ उधार लेकर दो लाख रुपये दे दिए।

गुलफाम ने जाजमऊ के रहने वाली कुलसुम बानो के बेटे मो. इसरार (23) और रेहाना के बेटे शानू (20) को इसी तरह नौकरी का झांसा देकर उनसे भी दो-दो लाख रूपए ले लिये। मुसाफिर ने बताया कि गुलफाम ने तीनों लड़के एक दिसंबर 2017 को कानपुर से हैदराबाद ट्रेन के जरिये यह कहकर भेज दिया कि वहां स्टेशन पर एजेंट रिसीव कर लेगा। लेकिन वहां पर एजेंट नहीं मिला। लड़कों को वहां नौ दिन किराए पर कमरा लेकर रहना पड़ा।

पैसा खत्म हो गया तो काफी कहने के बाद गुलफाम ने पांच हजार रुपये एजेंट के जरिए भेजे। 10 दिसंबर की रात एजेंट ने लड़कों को हवाई यात्रा का टिकट दिया। 12 दिसंबर को लड़के मलेशिया के कुआलालम्पुर पहुंच गए। तीन दिन उन्हें एक जगह रखने के बाद 15 दिसंबर को सीमेंट फैक्ट्री में लगा दिया गया जबकि बताया गया था कि एसी रूम में बैठकर काम करना है। परिजनों का दावा है कि लड़कों से लगातार बात हो रही थी। उन्होंने बताया कि वह सुरक्षित नहीं हैं। एक कमरे में कई लोगों के साथ रखा गया है। तीन बार पुलिस ने पकड़ा था लेकिन फैक्ट्री जीएम ने छुड़वा लिया। कुलसुम बानो ने बताया कि 16 मार्च 2018 की सुबह 4ः25 बजे अंतिम वाइस मैसेज आया था।

इसके बाद से कोई खबर नहीं मिल रही है। एजेंट के जरिए ही उन्हें पता चला कि पुलिस ने कमरे में छापा मारकर सबको पकड़ लिया है। पीड़ित परिजनों ने जिलाधिकारी सुरेन्द्र सिंह से मिलकर मलेशिया में फंसे लड़कों के लिए विदेश मंत्रालय तक बात पहुंचाने की अपील की। लेकिन कई दिन बाद भी कुछ जानकारी न मिलने पर अब परिजन सोमवार को दिल्ली में विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से बच्चों को छुडाने के लिए गुहार लगाएंगे।

15 दिन का था वीजा
पीड़ित परिजनों की सहायता कर रहे अधिवक्ता सज्जन सिंह ने बताया कि जब पूरे मामले की छानबीन की गई तो पता चला कि मो. रईस, शानू और मो. इसरार को मलेशिया से जो इंट्री नोट (वीजा) जारी हुआ, वह 21 नवंबर 2017 से 21 फरवरी 2018 तक के लिए है। इन तीन माह में 15 दिनों के लिए मलेशिया घूमने की इजाजत मिली थी।

एजेंट द्वारा इन तीनों लड़कों को इसी वीजा के आधार पर नौकरी कराने के लिए मलेशिया भेज दिया गया। ट्रैवेल एजेंट शारिक अल्वी ने बताया कि वीजा पर ’फॉर इश्यू ऑफ वीपी (सोशल) 15 डेज ओनली’ लिखा है। इसका मतलब है कि वीजा मलेशिया में किसी कांफ्रेंस में हिस्सा लेने के नाम पर बनवाया गया था। अधिवक्ता ने बताया कि पीड़ित परिजनों को रविवार ट्रेन से दिल्ली ले जाएंगें और वहीं पर विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से संपर्क किया जाएगा।

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