भागवतजी, महंगाई से परेशान लोगो को काहे गुमराह कर रहे हो..?

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कोंग्रेस इतनी बाहुबली है की सुप्रीम कोर्ट के जज भी उनसे डरते है तो मोदी सरकार क्यों हाथ पर हाथ धरे बैठी है..?

चुनावी नैया पार नहीं होंगी तो आरएसएस उतर पड़ता है मैदान में। ऐसा ही कुछ इस बार भी हो रहा है। पांच में से चार राज्यों के चुनाव होने जा रहे है। राजस्थान,मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा को लगा की फिर से जितना मुश्किल है, इसलिए राम मंदिर का मुद्दा ले आये फिर से मैदान में। अयोध्या में माहोल ऐसा बनाया गया की मानो राम मंदिर का काम शुरू हो गया। इसमें कोई शक नहीं की राम मंदिर बनना चाहिए। लेकिन मामला जब कोर्ट के अधीन है तब फैंसले का इन्तेजार करना ही समजदारी है। लेकिन ऐसी समजदारी को एक कोने में फेंक कर विश्व हिन्दू परिषद् को आगे कर भाजपा और संघ ने छोटे बच्चे की जिद के समान की बस हमें तो अभी का अभी आज ही मंदिर निर्माण चाहिए। और इसी चुनावी रणनीति के तहत महंगाई से परेशान लोगो के हाथो में चाँद बताकर पूरी अयोध्या नगरी भर दी गई और नतीजा क्या आया? सरकार मंदिर के लिए अध्यादेश लाये क्योंकि राम मंदिर सुप्रीम कोर्ट की प्राथमिकता नहीं है, ऐसी गूंज लगाईं गई।
सोश्यल मिडिया में किसी ने बताया की राष्ट्रपति से लेकर जहाँ मंदिर बनना है वहां सब के सब संघ के ही नामदार लोग है। कहते है न की सैयां भये थानेदार अब डर काहे का…? भाजपा, मोदी सरकार और संघ को आखिर मंदिर के लिए अध्यादेश लाने में और कानून बनाने में कौन रोकता हैजी? उसके बजाय ये कहना की प्रतिपक्ष कोंग्रेस सुप्रीम कोर्ट के जजों को डराती है की खबरदार मंदिर के पक्ष में फैंसला दिया तो आपके खिलाफ महाभियोग लाया जायेंगा….! ये कहा है देश के मान्यवर प्रधानमंत्री जी ने। सवाल ये है की सरकार कोंग्रेस की है या भाजपा की ? कोंग्रेस इतनी बाहुबली है की सुप्रीम कोर्ट के जज भी उनसे डरते है तो मोदी सरकार क्यों हाथ पर हाथ धरे बैठी है? जजों को डरानेवालो को डालो जेल के सलाखों के पीछे। कौन रोकता है सरकार को…? लेकिन बात कुछ ओर और लोगो को कहना कुछ ओर।
मोहन भागवतजी राम मंदिर के लिए देश की जनता को गुमराह करने की बजाय आपकी अपनी चहेती सरकार को कहे की कानून बनाए। कोर्ट को बीचमे घसीट कर उसका अपमान करना कतई ठीक नहीं। नाच न जाने और आँगन टेढ़ा कहावत की तरह भागवतजी में अपने प्रचारक प्रधानमंत्री जी के ऊपर इस बारे में दबाव लाने की हिम्मत नहीं औए कोर्ट पर इल्जाम लगा रहे है। कोर्ट पर विश्वास ना हो तो जयश्री राम का नारा लगा कर मंदिर निर्माण का काम शुरु हो। बाबरी के ढहाने में जब कोर्ट की सुनी नहीं और कल्याणसिंह को इस्तीफा देना पड़ा उसी तरह योगीजी भी इस्तीफा देने से मना नहीं करेंगे यदि राम मंदिर का काम शुरू होता हो तो। ये सब चुनावी ड्रामेबाजी संघ और भाजपा न करे। आपकी सरकारों ने पांच-दस साल जो काम किया उसके आधार पर लोगो से फिर से जनादेश मांगे। रामजी को काहे परेशान करते हो। लोगो के साथ साथ शायद सीतामैयाजी के करीब बैठे रामजी भी सोचविचार कर रहे होंगे की चुनाव के वक्त ही ये मुझे क्यों याद करते है सीते…?

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