गंगा, घाटों को जीवंत रखने के लिए उत्तराखंड HC ने जारी किए महत्वपूर्ण आदेश

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नैनीताल : उत्तराखंड हाईकोर्ट ने गंगा की पवित्रता को बनाए रखने और उसके किनारों पर बसे घाटों को साफ सुथरा रखने के लिए कई महत्वपूर्ण आदेश जारी किए हैं। न्यायालय ने घाटों को साफ रखने, गंगा में बहने वाले सीवरों लाइनों को सील करने, गंगा घाटों पर महिलाओं के कपड़े बदलने के लिए चेजिंग रूम बनाने तथा घाटों पर सतर्क नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरा लगाने के निर्देश भी दिए हैं।

कोर्ट ने सरकार को भी कहा कि वह इन सभी चीजों के लिए पर्याप्त धन की व्यवस्था करे। न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की युगलपीठ ने उत्तराखंड जल संस्थान को भी निर्देश दिए कि गंगा में किसी प्रकार का सीवर न बहे। गंगा में बहने वाली सीवर लाइनों के खिलाफ कार्रवाई करें। पेजयल निगम के अधीक्षण अभियंता ने कोर्ट को बताया कि पंपिंग स्टेशन और सीवर उपचार सयंत्र निर्माण का काम 31 दिसंबर तक पूरा हो जाएगा।

इसके बाद अनुपचारित पानी की एक बूंद भी गंगा में नहीं बहेगी। न्यायालय ने हरिद्वार के सिंचाई विभाग को पर्याप्त संख्या में शौचालय बनाने के लिए हरिद्वार नगर निगम को जमीन उपलब्ध कराने कहा है। निगम के आयुक्त से इस संबंध में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ 48 घंटे के अंदर एक बैठक करने की भी बात की है।

सिंचाई विभाग से 15 दिन के अंदर निगम को जमीन का हस्तांतरण करने का भी आदेश दिया है। कल सुनवाई के दौरान निगम के आयुक्त ललित नारायण मिश्रा और पेयजल निगम के अधीक्षण अभियंता रस्तोगी न्यायालय में पेश हुए।
निगम के आयुक्त ने अदालत को बताया कि गंगा के घाटों पर 16 सीसीटीवी कैमरों ने काम करना शुरू कर दिया है और अन्य 72 कैमरे लगाए जाने के लिए प्रक्रिया जारी है। इसके बाद कोर्ट ने निगम को निर्देश दिए कि एक माह के अंदर कैमरे लगाने की प्रक्रिया पूरी करें।

कल देर शाम को जारी आदेश में कोर्ट ने निगम को यह भी निर्देश दिए कि महिलाओं के लिए कपड़े बदलने के लिए 100 अत्याधुनिक चेजिंग रूम बनाए जाएं। इनमें से 50 चेजिंग रूम हरि की पौड़ी पर स्थापित किए जाएं। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि भीड़भाड़ को देखते हुए छह माह के अंदर 300 शौचालयों का निर्माण करें तथा इनकी नियमित रूप से सफाई बरकरार रखी जाए।

कोर्ट ने घाटों को साफ सुथरा रखने के साथ-साथ हर तीन घंटे में घाटों की सफाई करने के भी निर्देश निगमायुक्त को दिए हैं। अदालत ने इन सभी मामलों के क्रियान्वयन के संबंध में संबद्ध पक्षों को रिपोर्ट अगली तिथि 21 दिसंबर तक न्यायालय में पेश करने को कहा है।

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